(डीपफेक का बढ़ता खतरा और सिंथेटिक सामग्री की लेबलिंग : नवाचार और जवाबदेही का संतुलन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न डीपफेक तकनीक ने सूचना की विश्वसनीयता को गंभीर चुनौती दी है। झूठी वीडियो, ऑडियो और छवियाँ समाज में भ्रम और अविश्वास फैला रही हैं। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने सिंथेटिक सामग्री की अनिवार्य लेबलिंग की नीति प्रस्तावित की है, जिसके तहत एआई जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से “एआई द्वारा निर्मित” लिखा होगा। यह कदम पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगा कि तकनीकी नवाचार जारी रहे लेकिन उसका दुरुपयोग रोका…
Author: News Desk
देवानंद सिंह बिहार की राजधानी पटना से लगभग सौ किलोमीटर दूर स्थित मोकामा का टाल क्षेत्र एक बार फिर खूनी रंजिश का गवाह बना है। चुनावी मौसम में जब हर गली-मोहल्ला राजनीतिक नारों से गूंज रहा था, उसी दौरान इस इलाके से ऐसी वारदात सामने आई जिसने पूरे बिहार की राजनीति को झकझोर कर रख दिया। घोसवारी थाने के तारतर गांव में दुलारचंद यादव की निर्मम हत्या ने न केवल मोकामा के राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है, बल्कि इसने एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार की राजनीति वास्तव में बाहुबल और बदले…
छोटे सरकार बनाम सूरजभान : मोकामा में बाहुबल की आड़ में जातीय साजिश का खेल! मोकामा में बाहुबली दुलारचंद यादव की हत्या से सियासत गरमाई, अनंत सिंह पर एफआईआर दर्ज जन सुराज पार्टी नेता दुलार चंद यादव की मौत पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, गोली नहीं बनी मौत की वजह पत्थरबाजी में घायल हुईं राजद प्रत्याशी सूरजभान की पत्नी बीना देवी मोकामा में जनसंपर्क के दौरान असामाजिक तत्वों ने किया हमला, इलाके में तनाव देवानंद सिंह मोकामा की घटना, जिसमें जन सुराज नेता दुलारचंद यादव की मौत हुई, सिर्फ एक राजनीतिक झड़प नहीं लगती यह बिहार की सियासत…
नीति और प्रयोगात्मक दृष्टि से ‘क्लाउड सीडिंग’ एक साहसिक शुरुआत देवानंद सिंह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर सर्दियों के धुंधलके में डूबी है। हवा में घुलते ज़हर, घटती दृश्यता और जलती आंखों के बीच, इस बार उम्मीदें विज्ञान से थीं, आसमान से नहीं। प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने कृत्रिम बारिश यानी ‘क्लाउड सीडिंग’ का प्रयोग किया, लेकिन यह प्रयोग उम्मीदों के मुताबिक़ सफल नहीं हो सका। विज्ञान की भाषा में कहें तो यह एक असफल प्रयास था, किंतु नीति और प्रयोगात्मक दृष्टि से यह एक साहसिक शुरुआत मानी जा सकती है। मंगलवार को सेसना विमान ने…
नियंत्रण या निगरानी : असम के नए कानूनों का व्यापक संदेश “जब राज्य निजी जीवन में झाँकने लगे : असम के नए कानूनों का व्यापक संदेश” कानून ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और समान नागरिक अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है। समर्थक इसे सामाजिक सुधार मानते हैं, जबकि आलोचक इसे राज्य द्वारा निजी जीवन में हस्तक्षेप बताते हैं। भारत में जनसंख्या नियंत्रण के वास्तविक उपाय शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण से आते हैं, न कि कठोर कानूनों से। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिकों को नियंत्रित नहीं, बल्कि सक्षम बनाया जाए। – डॉ. प्रियंका सौरभ भारत जैसे विविध और…
एसआईआर की सार्थक पहल का विरोध नहीं, स्वागत हो -ललित गर्ग- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिहार के बाद अब देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष ग्रहण पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत करने की घोषणा करके चुनाव विसंगतियों एवं कमियों को दूर करने का सराहनीय एवं साहसिक कार्य किया है। यह पहल न केवल तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया भर है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने की एक निर्णायक कोशिश है। लोकतंत्र की आत्मा उसके निर्वाचन तंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता में बसती है और चुनाव आयोग का यह कदम उसी दिशा में…
🙏🌅नमस्कार 🌅🙏 *आपका *राष्ट्र* *आपका *संवाद* *राष्ट्र संवाद पञिका* *राष्ट्र संवाद तीसरे दशक में* *बेमिसाल 25 साल* *राष्ट्र संवाद की मुहिम : सकारात्मक पत्रकारिता से ही बदलेगा समाज* 🪷जय गणेश 🪷 💐दिनांक 31अक्टूबर शुक्रवार 2025 www.rashtrasamvad.com www.rastrasamvad.com Devanandsingh.com rashtrasamwad. com *********************** Check out rashtrasamvad (@rashtrasamvad1): https://twitter.com/rashtrasamvad1?s=08 ************************* *NOW RASHTRASAMVAD AVAILABLE ON MOBILE APP* JHAHIN2000/1039 *राष्ट्रसंवाद दैनिक:-* JHAHIN01092 *राष्ट्र संवाद नजरिया : नियंत्रण या निगरानी : असम के नए कानूनों का व्यापक संदेश* *“जब राज्य निजी जीवन में झाँकने लगे : असम के नए कानूनों का व्यापक संदेश”* *एसआईआर की सार्थक पहल का विरोध नहीं, स्वागत हो* *नीति और प्रयोगात्मक दृष्टि…
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(भाषा के पतन से लोकप्रियता के उत्कर्ष तक की कहानी) फूहड़ शब्दों का ग्लैमर और वर्चुअल समाज की विडंबना सोशल मीडिया पर अब केवल तस्वीरें या वीडियो नहीं, शब्द भी बिकने लगे हैं। फूहड़ता और अपशब्दों ने अभिव्यक्ति की मर्यादा को पीछे छोड़ दिया है। लाइक, कमेंट और शेयर की भूख ने भाषा को बाजार में बदल दिया है। समाज का वही वर्ग जो संस्कारों की बातें करता है, वही इन पोस्टों पर तालियाँ बजाता है। यह प्रवृत्ति केवल भाषा का पतन नहीं, सोच की गिरावट भी है। सभ्यता की पहली पहचान भाषा होती है—जब भाषा गिरती है, तो समाज…
विश्व शहर दिवस- 31 अक्टूबर 2025 शहर जहां सौन्दर्य, संभावनाएं एवं संवेदनाएं बिछी हो -ललित गर्ग- विश्व शहर दिवस हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शहरीकरण में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की रुचि बढ़ाना, शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान करने में देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना और सतत विश्व नगर योजना को अधिक मानवीय, अपराधमुक्त एवं पर्यावरण संपोषक बनाना है। यह दिवस पहली बार 2014 में मनाया गया था। इसका उद्देश्य शहरीकरण के रुझानों, चुनौतियों और सतत शहरी विकास के दृष्टिकोण के बारे में अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ाना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और समतामूलक, समृद्ध, टिकाऊ…
