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    Home » अंकिता मर्डरः इज्जत गई, पद गया… बिगड़ैल बेटे पुलकित का मन न बढ़ाते तो ये दिन न देखते विनोद आर्य!
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    अंकिता मर्डरः इज्जत गई, पद गया… बिगड़ैल बेटे पुलकित का मन न बढ़ाते तो ये दिन न देखते विनोद आर्य!

    News DeskBy News DeskSeptember 25, 2022No Comments4 Mins Read
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    अंकिता मर्डरः इज्जत गई, पद गया… बिगड़ैल बेटे पुलकित का मन न बढ़ाते तो ये दिन न देखते विनोद आर्य!

    अंकिता भंडारी के व्हाट्सअप में खुलासा, रिसेप्शनिस्ट को 10000 रुपये में कस्टमर्स से सेक्स के लिए करते थे मजबूर

     

    ऋषिकेश: अंकिता भंडारी हत्या मामले में यमकेश्वर स्थित रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलकित को पुलिस ने जब शुक्रवार को हिरासत में लिया था, उस समय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। करीब 300 लोगों ने पुलिस की गाड़ी को घेर कर पुलकित और उसके साथियों की पिटाई कर दी। कपड़े फाड़ डाले। अंकिता की डेड बॉडी के चिला पावर स्टेशन नहर के बरामदगी के बाद उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ऐक्शन में आई। डीआईजी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई। आरोपी पुलकित आर्य के पिता और पूर्व राज्य मंत्री विनोद आर्य को भाजपा ने निष्कासित किया। वहीं, पुलकित के भाई अंकित आर्य को धामी सरकार ने ओबीसी आयोग के उपाध्यक्ष पद से निष्कासित कर दिया गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर कहना शुरू कर दिया, काश विनोद आर्य ने पुलकित को अच्छी परवरिश दी होती तो उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता।

    पुलकित आर्य ने पुलिस की पूछताछ में अपना गुनाह कुबूल किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलकित ने पुलिस को चिला कैनाल में अंकिता को धक्का दिए जाने की बात स्वीकार की थी। अब सवाल यहां उठता है कि अगर उसने शराब के नशे में धक्का दे दिया तो फिर उसके साथ मौजूद साथियों ने अंकिता को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की? अंकिता कैनाल में डूबती रही और पुलकित एवं उसके साथी उसकी मौत का तमाशा देखते रहे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से कई चीजों का खुलासा होना है। लेकिन, इस घटना ने विनोद आर्य की परवरिश पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल वही, परिवार ने पुलकित की गलतियों पर पर्दा क्यों डाला? अगर उचित समय पर ऐक्शन लेते तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। पुलकित के किस्से पहले भी सामने आए थे। लेकिन, इस बार तो उसने सभी सीमाएं पार कर दी। यह गुनाह है। इस गुनाह की सजा पूरे परिवार को मिली है।
    सत्ता के नशे की उपज पुलकित की करतूत
    आखिर पुलकित जैसे शोहदे पैदा क्यों होते हैं? सवाल का जवाब खोजने जाएंगे तो पाएंगे कि यह पहाड़ी राज्य की दबंग होती सत्ता के सिस्टम की उपज हैं। पुलकित आर्य के बनने की कहानी से आप इसे बेहतर तरीके से समझ जाएंगे। अगर भाजपा नेता पिता ने सही समय पर बेटे के कान उमेठ दिए होते, या फिर देश की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी बीजेपी के हाईकमान ने सीएम धामी को कस दिया होता, तो शायद अंकिता बच जाती। लॉकडाउन को याद कीजिए। पूरा देश घर में बंद था, लेकिन पुलकित अपने पिता की पशुपालन बोर्ड उपाध्यक्ष की प्लेट वाली गाड़ी के साथ चमोली में अमरमणि त्रिपाठी के साथ सैर-सपाटे पर था। पकड़े जाने पर भी उस पर कोई बड़ा ऐक्शन नहीं होता है। पुलकित को पता होता है कि सत्ताधारी पार्टी में पिता और बड़े भाई की पहुंच उसका बाल बांका होने नहीं देगी।

    इससे पहले 2016 में ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में मुन्नाभाई कांड खुलता है। एडमिशन फर्जीवाड़े में पुलकित सस्पेंड कर दिया जाता है। उस पर केस दर्ज होते हैं, लेकिन यहां भी दर्जाधारी मंत्री पिता की पहुंच काम आती है। उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता। यही नहीं, लाड़ले को कॉलेज में दोबारा दाखिला दिलवाने के लिए पिता ने क्या किया इसका खुलासा बाद में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार रहे मृत्युंजय मिश्रा करते हैं। मिश्रा बताते हैं कि बेटे को दोबारा दाखिला दिलवाने के लिए बीजेपी नेता विनोद आर्य ने दो करोड़ नकद और एक ऑडी कार देने की पेशकश की थी।

    आज शर्म में परिवार
    पुलकित की करतूत ने पूरे परिवार का सिर शर्म से झुका दिया है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह बिष्ट ने पुलकित के पिता विनोद आर्य को पार्टी से निकालने का फरमान जारी कर दिया। आदेश में बेटे की करतूत का जिक्र है। अंकिता हत्याकांड में बेटे का नाम आया तो पार्टी ने उनसे पल्ला झाड़ लिया। वहीं, धामी सरकार ने भाई अंकित आर्य को भी पार्टी से निकालने का फरमान जारी कर दिया। समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव एल. फैनई ने उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग में नामित उपाध्यक्ष अंकित आर्य को हटाने का आदेश जारी किया।

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