लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के निर्मल गेस्ट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री और कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी ने विपक्षी दल पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में लोकतंत्र की आड़ में भीड़तंत्र को बढ़ावा दे रही कांग्रेस संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार कर रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों की बात तो करती है, लेकिन धरातल पर वह केवल भ्रम और अस्थिरता फैलाने का काम कर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई संवैधानिक संस्था निष्पक्ष रूप से कार्य करती है, तो कांग्रेस उसे निशाना बनाती है ताकि संस्थाओं के प्रति जनता का अविश्वास बढ़ाया जा सके।
लोकतंत्र की आड़ में भीड़तंत्र को बढ़ावा दे रही कांग्रेस: भाजपा का नया अभियान
इस गंभीर मुद्दे को जनता के सामने लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। अन्नपूर्णा देवी ने घोषणा की कि भाजपा 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक एक विशेष अभियान चलाएगी, जिसका शीर्षक ‘लोकतंत्र बचाओ-भीड़तंत्र हटाओ’ रखा गया है। इस अभियान के माध्यम से पार्टी यह बताने का प्रयास करेगी कि किस प्रकार विपक्षी दल लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रहे हैं।
उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण प्रक्रिया पर बात करते हुए कहा कि यदि किसी मतदाता को सूची में कोई आपत्ति है, तो उसके लिए एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी प्रकार की आपत्ति को संबंधित प्रमाणों के साथ आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि सड़कों पर भीड़ इकट्ठा करके शोर मचाना चाहिए।
अन्नपूर्णा देवी ने कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पार्टी केवल अपनी सुविधा के अनुसार लोकतंत्र की बात करती है। उन्होंने तर्क दिया कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, तो वह चुनावी प्रक्रिया की सराहना करती है, लेकिन जैसे ही उसे हार का सामना करना पड़ता है, वह तुरंत ईवीएम (EVM) और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगती है। यह व्यवहार उनकी हताशा और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनके अनादर को दर्शाता है।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए आपातकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास पर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है क्योंकि उन्होंने स्वयं देश में लोकतंत्र का गला घोंटा था। उनके अनुसार, जो पार्टी खुद तानाशाही का चेहरा रही हो, उसे लोकतंत्र पर उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।
राहुल गांधी को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने उन्हें सलाह दी कि वे भारतीय राजनीति की महान परंपराओं को समझें। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज जैसी दिग्गज नेताओं की संसदीय परंपराओं और उनके शिष्टाचार से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने विरोध के बावजूद मर्यादाओं को कभी नहीं लांघा।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक और दल का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए ठोस और अकाट्य प्रमाण होने चाहिए, न कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए निराधार आरोप लगाने चाहिए। भाजपा अपने आगामी अभियान के जरिए इन सभी मुद्दों को देश के कोने-कोने तक ले जाएगी ताकि जनता स्वयं तय कर सके कि कौन वास्तव में लोकतंत्र का रक्षक है।
इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में कई अन्य गणमान्य नेता भी उपस्थित रहे, जिनमें सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक पूर्णिमा साहू, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह, महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा और जिला मीडिया प्रभारी प्रेम झा शामिल थे। इन सभी नेताओं ने केंद्रीय मंत्री के विचारों का समर्थन किया और आगामी अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आक्रामक अभियान से चुनाव से पहले ध्रुवीकरण और मुद्दों की स्पष्टता बढ़ती है। आप भारतीय चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रक्रियाओं के बारे में अधिक जानकारी Election Commission of India की वेबसाइट पर प्राप्त कर सकते हैं।

