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    यूसीआईएल संपदा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप, 20 वर्षों से जमे अधिकारी की संपत्ति की सीबीआई जांच की मांग

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMay 18, 2026No Comments3 Mins Read
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    यूसीआईएल संपदा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप, 20 वर्षों से जमे अधिकारी की संपत्ति की सीबीआई जांच की मांग

    राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
    जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के संपदा विभाग पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं। विभाग में लगभग 20 वर्षों से पदस्थापित सिविल अधिकारी दिलीप कुमार मंडल को लेकर कर्मचारियों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं तथा उनकी संपत्ति की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।

    कर्मचारियों का आरोप है कि यूसीआईएल प्रबंधन हर वर्ष कॉलोनी के रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च करता है, लेकिन क्वार्टर जर्जर हो चुके हैं। पाइपलाइन टूटी हुई हैं, सीवरेज टैंक ओवरफ्लो कर रहे हैं, दरवाजे-खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं और सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। कई मकान बांस के सहारे टिके हुए हैं और प्लास्टर गिरने से कर्मचारियों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    हाल ही में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई कॉलोनी की चारदीवारी कुछ ही महीनों में ढह गई। वहीं लगभग 70 लाख रुपये की लागत से बी-टाइप क्वार्टरों में कराया गया रंग-रोगन भी कुछ ही समय में उखड़ने लगा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    कॉलोनी में साफ-सफाई की बदहाल स्थिति, झाड़ियों की अनदेखी और बाहरी लोगों की बढ़ती आवाजाही के कारण नशाखोरी, चोरी और मारपीट की घटनाओं में वृद्धि होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कॉलोनी की हालत इतनी खराब हो गई है कि वे अपने घरों में मेहमान बुलाने में भी संकोच महसूस करते हैं।

    हाल ही में यूसीआईएल के नए सीएमडी डॉ. कचम आनंद राव ने पदभार संभाला है। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वे संपदा विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर कॉलोनी की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

    आरटीआई कार्यकर्ता सुनील मुर्मू ने सिविल अधिकारी दिलीप कुमार मंडल की कथित अघोषित संपत्तियों की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि निष्पक्ष जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

    निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

    2 करोड़ रुपये की लागत से बनी कॉलोनी की चारदीवारी कुछ ही महीनों में ढह गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।
    लगभग 70 लाख रुपये की लागत से बी-टाइप क्वार्टरों में कराया गया रंग-रोगन भी जल्द ही उखड़ने लगा है और दीवारें काली पड़ चुकी हैं, जबकि कार्य में वेदरकोट जैसे उच्च गुणवत्ता वाले पेंट के उपयोग का दावा किया गया था।
    निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय अखबारों ने भी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन संबंधित विभाग ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया।
    कॉलोनी की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।
    शिकायतों के बावजूद संपदा विभाग के अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

    नए सीएमडी के सामने बड़ी चुनौती
    हाल ही में पदभार संभालने वाले यूसीआईएल के नए सीएमडी डॉ. कचम आनंद राव के सामने कॉलोनी की बदहाल स्थिति सुधारना बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि वे संपदा विभाग की कार्यशैली की समीक्षा कर जवाबदेही तय करेंगे।

    20 वर्षों से जमे अधिकारी की संपत्ति की सीबीआई जांच की मांग यूसीआईएल संपदा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप
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