राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल: चांडिल थाना क्षेत्र के रसुनिया गांव में बन रहे पंचायत भवन के निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता और स्थानीय मजदूरों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन किसी भी पंचायत के विकास की आधारशिला माना जाता है, लेकिन जब उसी भवन के निर्माण में ही गड़बड़ी की आशंका हो तो उसकी गुणवत्ता और मजबूती पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
बताया जा रहा है कि रसुनिया पंचायत में पंचायत भवन निर्माण का टेंडर अभिनव इंडिया नामक कंपनी को मिला है। इसके बावजूद निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। नियमानुसार किसी भी सरकारी योजना के कार्यस्थल पर संवेदक का नाम, प्राक्कलित राशि, कार्य की अवधि और मजदूरी दर सहित अन्य जानकारी का बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सूचना बोर्ड के ही निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन जैसे बड़े निर्माण कार्य में कई मजदूरों की आवश्यकता होती है, लेकिन यहां स्थानीय मजदूरों को काम नहीं दिया जा रहा है। केवल दो स्थानीय महिलाओं को काम पर रखा गया है, जिन्हें प्रतिदिन 250 रुपये मजदूरी दी जा रही है। मजदूरी दर की भी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है।
निर्माण स्थल पर काम कर रहे लोगों ने बताया कि वे सभी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले हैं और अधिकांश मजदूर भी वहीं से लाए गए हैं।
गांव के निवासी राकेश रंजन महतो ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि झारखंड में हो रहे सरकारी निर्माण कार्यों में स्थानीय मजदूरों को ही काम नहीं मिल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पंचायत में मजदूरों की कमी नहीं है तो बाहर से मजदूर लाने की क्या जरूरत है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।

