लेखक: मनीषा शर्मा
सारदा विश्वविद्यालय की शोधार्थी आकांक्षा शर्मा ने प्राप्त की डॉक्टरेट डिग्री यह समाचार शैक्षणिक जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। ग्रेटर नोएडा स्थित सारदा विश्वविद्यालय के अंतर्गत ‘सारदा स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज’ के अंग्रेज़ी विभाग की शोधार्थी आकांक्षा शर्मा ने हाल ही में अपनी पीएच.डी. (Ph.D.) शोध सफलतापूर्वक पूर्ण कर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।
आकांक्षा शर्मा ने प्राप्त की डॉक्टरेट डिग्री: शोध विषय और महत्व
उनके शोध का विषय था— “Unravelling the Complexities of Death and Trauma in Select Literary Works of Indira Goswami”, अर्थात “इंदिरा गोस्वामी की चयनित साहित्यिक कृतियों में मृत्यु और मानसिक आघात की जटिलताओं का विश्लेषण।” ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध असमिया साहित्यकार मामोनी रायसम गोस्वामी (इंदिरा गोस्वामी) की रचनाओं में मृत्यु और मानसिक आघात के महत्वपूर्ण चित्रण पर आकांक्षा शर्मा ने यह गहन एवं आलोचनात्मक अध्ययन किया।
सारदा विश्वविद्यालय में असमिया साहित्य से संबंधित विषय पर डॉक्टरेट शोध करने वाली आकांक्षा शर्मा विश्वविद्यालय की शुरुआती शोधार्थियों में से एक हैं। उनके इस शोध ने विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय साहित्य के अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह शोध कार्य सारदा विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मुक्ता बोरा के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में पूरा हुआ।
विश्वविद्यालय नेतृत्व का सहयोग
आकांक्षा शर्मा ने अपनी इस सफलता में सारदा विश्वविद्यालय के उच्च नेतृत्व की भूमिका का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति प्रदीप कुमार गुप्ता और कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) शिवराम खारा की शोध-केंद्रित सोच और निरंतर सहयोग ने उनके जैसे शोधार्थियों को क्षेत्रीय साहित्य जैसे मौलिक और अंतर-विषयक विषयों पर कार्य करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया।
फरीदाबाद स्थित ‘रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी’ (RCB) की रजिस्ट्रार प्रोफेसर (डॉ.) शिवानी वशिष्ठ ने इस शोध के बाह्य परीक्षक (External Examiner) के रूप में अपनी भूमिका निभाई। वाइवा-वोसे (Viva Voce) के दौरान विश्वविद्यालय के शोध विभाग के डीन प्रोफेसर (डॉ.) भुवनेश कुमार, एसोसिएट डीन प्रोफेसर (डॉ.) मोहित साहनी, प्रोफेसर (डॉ.) एन.बी. सिंह, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की डीन प्रोफेसर (डॉ.) अन्विति गुप्ता, प्रोफेसर (डॉ.) हरि शंकर, डॉ. अजीत कुमार, आहतेशाम जहाँ सहित अंग्रेज़ी विभाग और संबंधित स्कूल के कई वरिष्ठ शिक्षक एवं शिक्षिकाएँ उपस्थित रहे।
असम के बरमा की रहने वाली आकांक्षा शर्मा ने अपनी इस उपलब्धि को अपने पिता कंदर्प शर्मा और माता मिनती शर्मा को समर्पित किया।
मनीषा शर्मा और ‘ब्रजभूमि वैभव’ से मिली विशेष प्रेरणा
अपने शोध के पूरे सफर के दौरान आकांक्षा शर्मा ने असम की प्रसिद्ध साहित्यकार मनीषा शर्मा से प्राप्त विशेष प्रेरणा और सहयोग को अत्यंत सम्मान के साथ याद किया। विशेष रूप से मनीषा शर्मा की प्रसिद्ध पुस्तक ‘ब्रजभूमि वैभव’, जिसमें वृंदावन, मथुरा, गोकुल आदि पवित्र धामों के प्रत्यक्ष दर्शन, आध्यात्मिक अनुभव और भौगोलिक अनुभूतियों को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है, ने आकांक्षा को गहराई से प्रेरित और प्रभावित किया।
‘ब्रजभूमि वैभव’ की प्रत्यक्ष दर्शन पर आधारित लेखन शैली और अनुभवों से विशेष प्रेरणा प्राप्त करते हुए आकांक्षा शर्मा ने साहित्यकार मनीषा शर्मा के प्रति अपनी विशेष कृतज्ञता व्यक्त की।
आकांक्षा शर्मा की यह सफलता न केवल सारदा विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय साहित्य आधारित शोध के स्तर को ऊँचा उठाती है, बल्कि शैक्षणिक जगत में भी एक सकारात्मक संदेश देती है। इंदिरा गोस्वामी के साहित्यिक योगदान पर किया गया यह शोध असमिया साहित्य के वैश्विक पहचान को मजबूत करता है।

