नई दिल्ली. देश में इंटरनेट आधारित राजनीतिक व्यंग्य का दौर एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. वायरल कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बाद अब सोशल मीडिया पर मक्खी जनता पार्टी (एमजेपी) नाम से एक नया डिजिटल मंच सामने आया है, जो इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है. मक्खी के इमोजी वाले इस नए प्लेटफॉर्म ने लोकतंत्र, उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) और आर्थिक विकास को अपने मुख्य एजेंडे के तौर पर पेश किया है.
इंस्टाग्राम पर लॉन्च हुआ नया मोर्चा
मक्खी जनता पार्टी ने इंस्टाग्राम पर अपना आधिकारिक अकाउंट शुरू करते हुए खुद को युवाओं का, युवाओं द्वारा और युवाओं के लिए संचालित एक राजनीतिक मोर्चा बताया है. प्लेटफॉर्म का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाना, नागरिकों के आत्मसम्मान की रक्षा करना और उनके मौलिक अधिकारों की पैरवी करना है. इंटरनेट पर वायरल हो रहे इस व्यंग्यात्मक अभियान को सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रिया मिल रही हैं.
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी से उपजा विचार, प्रशासन पर तंज
इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उदय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की एक अहम टिप्पणी के बाद हुआ है. सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शनों और सुरक्षा पाबंदियों से जुड़ी सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नसीहत दी थी कि प्रदर्शनों से निपटते समय मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करने की नीति से बचना चाहिए. इसी टिप्पणी को आधार बनाकर एमजेपी ने अपनी एक पोस्ट में सवाल उठाया है कि क्या किसी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को एक दिन कॉकरोच और अगले दिन मक्खी करार दिया जाना उचित है.
केवल विरोध की सियासत के बजाय काम और उत्पादकता पर जोर
मक्खी जनता पार्टी ने सीजेपी की केवल शिकायतों पर आधारित प्रदर्शन की राजनीति पर भी सीधा निशाना साधा है. मंच ने सवाल उठाया है कि क्या इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में लगने वाली ऊर्जा को देश में निवेश, उत्पादकता और रोजगार सृजन की दिशा में नहीं लगाया जा सकता. अपनी वेबसाइट पर इस अंतर को स्पष्ट करते हुए पार्टी ने लिखा है कि जहां कॉकरोच जी शिकायतें लेकर आते हैं और मक्खी मैडम केवल शोर मचाती हैं, वहीं भारत के असल निर्माता जमीन पर वास्तविक काम करते हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मंच सिर्फ मीम्स और नारों तक सीमित रहता है या किसी बड़े डिजिटल अभियान की शक्ल लेता है.

