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    Home » आजमगढ़ में संपन्न हुई भव्य काव्य गोष्ठी, साहित्यकारों ने सुनाई रचनाएं
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    आजमगढ़ में संपन्न हुई भव्य काव्य गोष्ठी, साहित्यकारों ने सुनाई रचनाएं

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 14, 2026No Comments3 Mins Read
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    काव्य गोष्ठी
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    आजमगढ़: उत्तर प्रदेश साहित्य सभा, आजमगढ़ एवं शालिनी साहित्य सृजन के संयुक्त तत्वावधान में प्रतिभा निकेतन सभागार में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन एवं श्रीमती सपना बनर्जी की सरस्वती वंदना से हुआ। आयोजिका श्रीमती शालिनी राय ने अतिथियों व साहित्यकारों का स्वागत किया।

    मुख्य अतिथि डॉ. प्रवेश सिंह ने साहित्यिक संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की, जबकि अध्यक्ष प्रो. प्रभुनाथ सिंह ‘मयंक’ ने साहित्य सृजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए रचनाकारों को निरंतर सृजन के लिए प्रेरित किया।

    काव्य गोष्ठी में जनपद के अनेक कवियों ने कविता पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम का संचालन राकेश पांडे ‘सागर’ ने किया तथा अंत में प्रो. ‘मयंक’ ने सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों की समीक्षा करते हुए अगले आयोजन तक गोष्ठी स्थगित करने की घोषणा की।

    काव्य गोष्ठी की प्रमुख झलकियां

    इस काव्य गोष्ठी ने आजमगढ़ की साहित्यिक विरासत को एक नया आयाम दिया। प्रतिभा निकेतन सभागार में उपस्थित श्रोता देर रात तक कविताओं की सरिता में डूबे रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवियों के साथ-साथ युवा रचनाकारों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिससे नई पीढ़ी को मंच मिला।

    मुख्य अतिथि डॉ. प्रवेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसी गोष्ठियां सामाजिक चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था लगातार साहित्य के प्रचार-प्रसार में लगी हुई है।

    अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. मयंक का मार्गदर्शन

    अध्यक्ष प्रो. प्रभुनाथ सिंह ‘मयंक’ ने अपने उद्बोधन में रचनाकारों से आह्वान किया कि वे सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं लिखें। उन्होंने कहा कि कविता केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम है। प्रो. मयंक ने आयोजिका श्रीमती शालिनी राय के प्रयासों की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

    कवियों ने बांधा समां, श्रोता हुए मंत्रमुग्ध

    गोष्ठी में राकेश पांडे ‘सागर’, श्रीमती सपना बनर्जी सहित जनपद के दो दर्जन से अधिक कवियों ने कविता पाठ किया। किसी ने श्रृंगार रस की कविताएं सुनाईं तो किसी ने वीर रस और करुण रस से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हास्य-व्यंग्य के कवियों ने भी खूब तालियां बटोरीं।

    कार्यक्रम का संचालन कर रहे राकेश पांडे ‘सागर’ ने अपनी विशिष्ट शैली से मंच को बांधे रखा। बीच-बीच में उनके हास्य-व्यंग्य के दोहों ने माहौल को हल्का-फुल्का बनाए रखा।

    आयोजन की विशेषताएं और भविष्य की योजनाएं

    इस काव्य गोष्ठी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें वरिष्ठ और युवा कवियों का अद्भुत संगम देखने को मिला। आयोजिका श्रीमती शालिनी राय ने बताया कि शालिनी साहित्य सृजन भविष्य में भी ऐसे आयोजन करता रहेगा। उन्होंने अगली गोष्ठी की तिथि शीघ्र घोषित करने की बात कही।

    उत्तर प्रदेश साहित्य सभा, आजमगढ़ इकाई के अध्यक्ष प्रो. मयंक ने कहा कि संस्था का प्रयास है कि साहित्य को जन-जन तक पहुंचाया जाए। इसके लिए ग्रामीण अंचलों में भी गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने आजमगढ़ की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करने पर जोर दिया।

    कार्यक्रम के अंत में सभी रचनाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और ऐसे कार्यक्रम नियमित अंतराल पर होते रहने की कामना की।

    इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामनरेश सिंह, प्रो. शिवकुमार त्रिपाठी, श्रीकांत मिश्र सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता में श्रीमती शालिनी राय की टीम का विशेष योगदान रहा।

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