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    Home » यूक्रेन में फंसे माफी गांव का मेडिकल छात्र, परिजन लगा रहे सरकार से वापसी की गुहार
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    यूक्रेन में फंसे माफी गांव का मेडिकल छात्र, परिजन लगा रहे सरकार से वापसी की गुहार

    Begusarai SamvadBy Begusarai SamvadFebruary 28, 2022No Comments4 Mins Read
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    आलोक वर्मा की रिपोर्ट

    वारिसलीगंज (नवादा): यूक्रेन पर रूसी हमले से भारतीय छात्र हताहत भले नहीं हुआ हो, परंतु बिहार के जिन परिवारों के बच्चे पढ़ाई को ले यूक्रेन में हैं उनकी धड़कने बढ़ी हुई है. परिवार के सदस्यों की रातों की नींद खराब हो रही है. इसी कड़ी में यूक्रेन में मेडिकल के अंतिम बर्ष की पढ़ाई कर रहे नगर परिषद के माफी ग्रामीण पूर्व वार्ड पार्षद स्व अरुण कुमार सिन्हा का कनिष्ठ पुत्र प्रवीण कुमार उर्फ बिट्टू के वारिसलीगंज बाजार स्थित आवास पर शुक्रवार एवं शनिवार को दिनभर परिजन चिंतित नज़र आये.

    बता दें कि छात्र प्रवीण कुमार उर्फ बिट्टू भी मेडिकल की पढ़ाई करने को ले यूक्रेन के उडैसा शहर स्थित मेडिकल कॉलेज गए हैं. जिन्हे जारी युद्ध के कारण कमरों में कैद होकर रहना पड़ रहा है. छात्र में दूरभाष पर बताया कि यूक्रेन में छुपे रहे हजारों भारतीय छात्र नजदीकी बॉर्डर खुलवाने की प्रतीक्षा में है ताकि सुरक्षित अपना वतन लौट सके. युद्ध की स्थित में सभी भारतीय छात्र  वतन लौटने कोबले भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं.

    नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ यूक्रेन मेडिकल कॉलेज में अंतिम और छठे वर्ष की मेडिकल पढ़ाई कर रहे वारिसलीगंज के छात्र प्रवीण ने फोन पर बताया कि जो सीमा खुला हुआ है. उसके निकट का शहर हंगरी और रोमानिया आदि शहरों से मेडिकल के छात्रों को भारत ले जाया जा रहा है. लेकिन वेस्टर्न यूक्रेन में पड़ने वाले शहर जो इन सीमा क्षेत्र से करीब 500 किलोमीटर से भी अधिक दूर है. उसको लाने को ले युद्ध के कारण किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है. छात्र ने बताया कि वैसे  तो सम्पूर्ण यूक्रेन पर रूस का हमला जारी है. परंतु हमले में सबसे ज्यादा प्रभावित साउथ यूक्रेन है. उड़ैसा शहर में मेडिकल कॉलेजो में करीब एक हजार से अधिक भारतीय छात्र रहते हैं। जिन्हें खुले हुए सीमा क्षेत्र तक जाने के लिए 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी होगी. जारी युद्ध के कारण यूक्रेन की सरकार ने सड़क मार्ग को बंद कर लोगों को घर से बाहर निकलने के लिए मना कर दिया है. आसमान में उड़ते रूस और यूक्रेन के युद्धक विमान की आवाजों और बमों की धमाकों की आवाज सुनकर चिंतित भारतीय छात्रों ने शहर के नजदीक मोल्दोवा बॉर्डर को खोलने से संबंधित पत्र भारत सरकार को भेज कर तत्काल मदद की गुहार लगाई गई है. छात्र ने बताया कि नजदीकी बॉर्डर खुल जाने के बाद किसी छात्र बॉर्डर के पास पहुंच जाएंगे. जहां से अपना वतन वापस लौट सकते हैं।

     

    सायरन बजते ही बंकर में छुपने को विवश हो जाते हैं छात्र : रूस यूक्रेन युद्ध के बीच धमाकों की आवाज से डरा सहमा भारतीय छात्र प्रवीण ने बताया कि पूरे यूक्रेन पर रूस का हमला जारी है. नजदीकी शहरों पर रूसी हमले की आवाज हमलोगों को हर समय सुनाई पड़ती है. हलांकि अभी तक उडैसा शहर को टारगेट कर कोई बड़ा धमाका नहीं किया गया है. बताया गया कि यूक्रेन प्रशासन द्वारा लाउडस्पीकर के माध्यम से बताया जाता है कि प्रशासन द्वारा सायरन बजने के साथ ही शहर लोग  छात्र नजदीकी बंकर में छुप जाएं. छात्र ने कहा कि मेरे शहर में इक्का-दुक्का वाहनों को छोड़कर पूर्णता सन्नाटा छाया हुआ है. शहर की सभी दुकानें बंद है. हमला होने की आशंका के पहले ही स्थानीय प्रशासन द्वारा राशन पानी संग्रह करने को कहा था. जिसे देखते हुए एक सप्ताह का राशन /पानी कमरे में जमा कर रखा गया है.

     

    चिंतित परिवार सरकार से छात्रों को वापस लाने की लगा रहे हैं गुहार : यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे माफी गांव का छात्र प्रवीण की मां नगर परिषद वारिसलीगंज की पूर्व वार्ड पार्षद उर्मिला देवी, व चाचणी वार्ड पार्षद सीमा देवी, छात्र का बड़ा भाई सिंटू कुमार समेत अन्य परिजन  यूक्रेन पर रूसी हमलों की जानकारी टेलीविजन के माध्यम से मिलने के कारण परेशान हैं. उक्त छात्र के मेडिकल की पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी है. छात्र की मां बताती है कि जब से यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ है. तब से टेलीविजन पर खबर देख देख कर सभी परिवार काफी चिंतित है. सरकार को चाहिए कि यूक्रेन के सभी शहरों में फंसे हुए भारतीय छात्रों को तत्काल स्वदेश लाने की व्यवस्था करे. परिजनो ने बताया कि मोबाइल से भी  कभी-कभी बात होती है. क्योंकि बात करते हुए भी हमलों की आवाज व सायरन  की आवाज सुनाई पड़ने लगती है.

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