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    Home » लाठीचार्ज के विरोध में किसान लघु सचिवालय पर डटे रहेंगे
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    लाठीचार्ज के विरोध में किसान लघु सचिवालय पर डटे रहेंगे

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 8, 2021No Comments2 Mins Read
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    करनाल. हरियाणा के करनाल जिले के बसताड़ा टोल प्‍लाजा पर 28 अगस्त को हुए लाठीचार्ज के विरोध में किसानों ने विरोध का एलान कर दिया. प्रशासन से बातचीत विफल होने के बाद किसान बैरिकेड्स तोड़ते हुए लघु सचिवालय पहुंच गए. किसान लघु सचिवालय गेट के बाहर बैठे हुए हैं. यहीं लंगर व्यवस्था है और यहीं टैंट लगाए जाएंगे. किसान नेताओं का कहना है कॉल दी गई थी ज़िला सचिवालय के घेराव की वो कर दिया गया है. हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर बातचीत में हमारी मांग जो एसडीएम के खिलाफ मामला दर्ज करने की है उसको नहीं माना गया तो हमारी तरफ यूंही धरना जारी रहेगा. वहीं किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि किसानों ने लघु सचिवालय का तो अनिश्चितकालीन घेराव कर लिया है. किसान साथियों के साथ वे सचिवालय पर ही डटेंगे. यहीं से आगे की लड़ाई जारी रहेगी. इधर किसान नेता योगेंद्र यादव का कहना है कि किसान जिला सचिवालय को घेरने पहुंच चुके हैं. अब यहां सभी को शांति से बैठाकर अगली रणनीति तय की जाएगी. वहीं किसानों को मनाने में प्रशासन की विफलता ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं. किसान इस महापंचायत में अपने मूल मांगों के साथ-साथ लाठीचार्ज के बाद मृतक किसान सुशील काजल को न्याय दिलाने के मकसद से नई अनाज मंडी में एकत्रित हुए थे. तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने, एमएसपी की गारंटी देने संबंधी मुख्य मांगों के साथ-साथ लाठीचार्ज का आदेश देने वाले एसडीएम आयुष सिन्हा और इसमें संलिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी पूरी तरह बुलंद थी. दूसरी ओर, सरकार ने 28 अगस्त को लाठीचार्ज की घटना के कुछ दिन बाद एसडीएम आयुष सिन्हा का तबादला तो करनाल से चंडीगढ़ कर दिया था लेकिन किसान नेता इसे संबंधित अफसर के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं मानते हैं. किसान नेताओं ने वायरल हुई वीडियो में लाठीचार्ज का आदेश देने वाले एसडीएम के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करते हुए उन्हें बर्खास्त करने की मांग बुलंद कर रखी है. भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सरकार एसडीएम को बचाना चाहती है, उन्हें न तो मृतक किसान से कोई मतलब है और न ही संघर्ष कर रहे किसानों की मांगों से. इसलिए किसान भी कड़े से कड़ा इम्तिहान देने को तैयार हैं लेकिन सुशील काजल को न्याय दिलाए बिना अब कोई पीछे नहीं हटेगा.

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