नागाडीह मॉब लिंचिग के चार साल बाद भी न्याय से वंचित वर्मा परिवार
18 मई 2017 की शाम एक दिल दहला देने वाली घटना में कुछ अपराधियों द्वारा भीड़ एकत्रित करके एक ही परिवार के तीन सदस्य, राम सखी देवी, गौतम वर्मा एवं विकास वर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
तत्कालीन सरकार और प्रशासन ने असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा का परिचय देते हुए पूरे मामले को आपसी रंजिश साबित करने की हर सम्भव कोशिश की। पुलिस अपनी छवि बचाने के लिए और राजनैतिक दबाव में पूरी तरह निष्क्रिय और अपंग हो गई I नयी सरकार का रवैया तो पुरानी से भी उदासीन निकला।
नतीजा आज भी 5 से ज्यादा नामजद अभियुक्त फरार चल रहे हैं, आरोपी पुलिस ऑफिसर आमिश हुसैन को प्रोत्साहन के तौर प़र डीएसपी बना दिया गया और पीड़ित परिवार को चंद तथा कथित नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अपने निजी फायदे के लिए लगातार गुमराह करने का काम किया गया। नतीज़ा आज भी वर्मा परिवार सीबीआई जांच, मुआवजा और परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी (जैसा की तत्कालीन डीसी अमित कुमार द्वारा घटना के तुरंत बाद सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में वादा किया गया था) को तरस रहा है।
आज मानिक चंद्र प्रसाद के जुगसलाई स्थित आवास पर मृतकों की चौथी पुण्य तिथि पर परिवार और समाज के लोगों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
घटना के एकमात्र चश्मदीद और मृतकों के भाई उत्तम वर्मा का कहना है कि उन्हें कानून और न्यायालय पर आज भी भरोसा है और उनका परिवार अपने हक के लिए तब तक लड़ता रहेगा जब तक की सभी दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।

