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    Home » चमकता आईना सिर्फ अखबार ही नहीं, पत्रकारिता की पाठशाला भी है: अर्जुन मुंडा
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    चमकता आईना सिर्फ अखबार ही नहीं, पत्रकारिता की पाठशाला भी है: अर्जुन मुंडा

    Devanand SinghBy Devanand SinghJanuary 14, 2021No Comments8 Mins Read
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    चमकता आईना सिर्फ अखबार ही नहीं, पत्रकारिता की पाठशाला भी है: अर्जुन मुंडा

    मांगकर नहीं, खरीदकर पढ़ें अखबार: रघुवर दास

    चमकता आईना के 24वें स्थापना दिवस समारोह में जुटे समाज के दिग्गज, न्यूज वेबसाइट का हुआ लोकार्पण
    जमशेदपुर, 14 जनवरी (रिपोर्टर): भारत सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि चमकता आईना सिर्फ अखबार नहीं है, यह पत्रकारिता की पाठशाला(लर्निंग स्कूल) भी है. चमकता आईना का मतलब समाज का सही प्रतिबिम्ब प्रस्तुत करने वाला अखबार है. यह अखबार अपने संस्थापक संपादक स्व. ब्रह्मदेश सिंह शर्मा द्वारा स्थापित निर्भीक पत्रकारिता के मानदंडों को आत्मसात करते हुए समाज में अपनी भूमिका निभा रहा है. श्री मुंडा गुरुवार को सिदगोड़ा स्थित चमकता आईना के कार्यालय परिसर में आयोजित इसके 24वें स्थापना दिवस समारोह और चमकता आईना.कॉम नामक न्यूज वेबसाइट के लोकार्पण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे.
    उन्होंने कहा कि स्व. शर्मा ने साहित्यकार और निर्भीक पत्रकार के रूप में धनबाद से अपनी यात्रा शुरू की. यहां के लोग भी धनबाद की तमाम गतिविधियों पर नजर रखते हैं और अच्छी तरह जानते हैं कि वहां के माहौल में पत्रकारिता कितना दुष्कर काम था और है. बावजूद इसके उन्होंने अपनी लेखनी को रोके बिना निर्भीक पत्रकारिता की पहचान स्थापित की. निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता का चरित्र दर्पण की तरह होता है.
    श्रुति और स्मृति के बिना जीवन चल नहीं सकता
    उन्होंने कहा कि जहां जीवंत समाज होता है, वहां सकट तो आते रहते हैं लेकिन कभी-कभी संकट से ऊर्जा भी मिलती है. उसी ऊर्जा की बदौलत पूरी निष्पक्षता के साथ काम करने का संबल भी मिलता है. दो चीजों का श्री मुंडा ने उल्लेख किया-श्रुति और स्मृति और कहा कि इसके बिना जीनव चल नहीं सकता. जो समाज अतीत को भूल जाता है, वह अपने आप को व्यवस्थित नहीं कर पाता. उन्होंने साहित्यकारों और पत्रकारों की ओर इंतिगत करते हुए कहा कि आप जो लिखते हैं, आने वाले समय के लिए वही दस्तावेज बनता है, वही आनेवाली पीढ़ी के लिए इतिहास होता है. उसे ही लोग पढ़ते हैं. इसलिए तथ्यों के साथ लेखन होना चाहिए. मुगलों के शासनकाल में जो समाचार के रूप में समाज में परोसे गए, आज उसे ही हम इतिहास के रूप में पढ़ते हैं. इसलिए जो व्यक्ति जहां है, वह वहीं से अपनी श्र्रेष्ठ भूमिका सुनिश्चित करे. राष्ट्र कोई मिट्टी का टुकड़ा नहीं है. व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र बनता है. इसलिए अपनी भूमिका सुनिश्चित करें, खुद को बेहतर बनाएं. चाहे आप सामाजिक क्षेत्र में हों, व्यापारिक क्षेत्र में हों, राजनीतिक क्षेत्र में हों, वहीं से राष्ट्र के उत्थान के लिए अपनी भूमिका सुनिश्चित करें. आपकी सांस या धडक़नें कभी विश्राम नहीं मांगती. सांस है तो एहसास है. हम भी कुछ कर सकते हैं, कुछ दिखा सकते हैं. संयोग से वर्तमान में राष्ट्र को श्री नरेन्द्र मोदी के रूप में ऐसा प्रधान मंत्री मिला है जो राष्ट्र का बेहतर नेतृत्व तो कर ही रहा है, देशवासियों में भी नेतृत्व क्षमता विकसित कर रहा है. इससे देश के हर क्षेत्र में परिवर्तन दिख रहा है. उन्होंने चमकता आईना परिवार को इस मौके पर ढेर सारी शुभकामनाएं भी दीं.

    तीर धनुष वाले नहीं, सही मायने में गुरु थे ब्रह्देव सिंह शर्मा: पीएन सिंह
    धनबाद के सांसद श्री पशुपतिनाथ सिंह ने कहा कि आज तो बहुत गुरु दिख रहे हैं, तीर-धनुष लेकर खदेडऩे वाले भी, लेकिन स्व. ब्रह्मदेव सिंह शर्मा सही मायने में गुरु थे और वे उनके शिष्य हैं. चार साल तक उनके चरणों में बैठकर पढ़ाई की है. बिना राइफल-गोली के हम भी तीन बार सांसद और तीन बार विधायक बने हैं. कभी-कभी अभिमान भी हो जाता है. स्व. शर्मा के बारे में उन्होंने कहा कि पूरे धनबाद के लोग उन्हें गुरुजी के नाम से ज्यादा जानते हैं. धनबाद से उनकी पत्रकारिता की चर्चा करते हुए श्री सिंह ने कहा कि उन दिनों धनबाद से अंग्रेजी, बांग्ला के अखबार तो निकल रहे थे लेकिन हिन्दी का कोई अखबार नहीं था. दूसरी बात यह कि माहौल भी ठीक नहीं था. माफिया, गुंडा तत्व ज्यादा हावी थे. उस माहौल में गुरुजी ने हिन्दी अखबार निकालने का निश्चय किया और निकाला. निर्भीक और निष्पक्ष होकर पत्रकारिता शुरू की. किसी माफिया से समझौता नहीं किया. 1990 में किसी खबर से नाराज होकर धनबाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उसके बाद अविभाजित बिहार में राजद सरकार की कमियों को जब छापना श्ुारू किया तो पटना बुलाकर एड बंद करने की धमकी दी गई. बहुत संघर्ष किए और कई झंझावातों को झेलते हुए आज इस मुकाम पर यह अखबार पह़ुंचा है. यह समाचार पत्र तो खुद आईना है बदलते दौर के समाज का. जब जमशेदपुर से प्रकाशन शुरू किया तो यहां भी संघर्ष ने पीछा नहीं छोड़ा. अखबार लडख़ड़ाने लगा. उस समय राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा थे. उन्होंने इस अखबार को लडख़ड़ाती स्थिति में सहयोग किया और अखबार सुदृढ़ हुआ. आज भी राष्ट्रीय अखबारों की प्रतिस्पर्धा के बीच यह अखबार अगर चल रहा है तो उसका श्रेय इसके प्रबंध निदेशक ब्रजभूषण सिंह जिन्हें हम छोटकू भी कहते हैं, उनको जाता है. श्री सिंह ने समाज से अपील की कि सही पथ पर चलने वाले इस समाचार पत्र की मदद के हाथ बनाए रखें.

    मांगकर नहीं, खरीदकर पढ़ें अखबार: रघुवर दास
    पूर्व मुख्यमंत्री रघवर दास ने कहा कि भारत को डिजिटल इंडिया बनाना जरूरी है ताकि हर चीज आपके हाथ में हो. घर बैठे आप अधिकतर काम निपटा सकें. उन्होंने अखबार का निकलना जारी रहने के लिए दो चीजों पर फोकस किया. पहला कि लोग अखबार मांगकर नहीं, खरीदकर पढ़ें और दूसरा उसे विज्ञापन मिले. आय के इस स्रोत में निरंतरता रहनी चाहिए. विज्ञापन के दो मुख्य स्रोत हैं, एक समाज और दूसरा सरकार. सरकार कभी-कभी विज्ञापन देने में भेदभाव करती है. उन्होंने कहा कि अखबारों को तोड़मरोड़ कर और सनसनी वाली खबरों से बचना चाहिए तथा सही समाचार पाठकों को देना चाहिए. निर्भीक पत्रकारिता के साथ-साथ विश्वसनीयता भी खबरों के लिए जरूरी है. उन्होंने पूरे चमकता आईना परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चमकता आईना इसी तरह चमकता रहे.

    आज की पत्रकारिता चुनौतीपूर्ण: राकेश्वर पांडेय
    मजदूर नेता राकेश्वर पांडेय ने आज के दौर की पत्रकारिता को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि सच लिखने पर लोग नाराज होते हैं और समझौता करने पर खबरों की विश्वसनीयता संकट में आती है. पत्रकारों और अखबारों को इस द्वंद्व से भी गुजरना पड़ता है. गलतियों को सामने लाने पर विज्ञापन रोक दिया जाता है और पाठकों को अखबार में गुणवत्तापूर्ण खबरें चाहिए. उसमें पारदर्शिता भी चाहिए. पहले चुनौतियां इतनी नहीं थीं. जितनी आज के दौर में है. उन्होंने कामना की कि चमकता आईना परिवार स्व. शर्मा द्वारा स्थापित आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखे.

    श्री जयप्रकाश: टाटा मणिपाल मेडिकल कालेज के कानूनी सलाहकार श्री जयप्रकाश ने चमकता आईना के संस्थापक संपादक स्व. शर्मा को नमन करते हुए कहा कि इस समारोह के मंच से मैं देख रहा हूं कि हर व्यक्ति के चेहरे पर चमक ही नजर आ रही है. आज के दौर में जहां बड़े-बड़े अखबार बाजार में मौजूद हैं, वैसे में श्री ब्रजभूषण सिंह ने यह साबित कर दिया कि व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर भी अखबार निकाले जा सकते हैं.
    हरिवल्लभ सिंह आरसी, महासचिव श्रीकृष्णसिन्हा संस्थान: श्री सिन्हा ने कहा कि आईना तब चमकता है जब उस पर प्रकाश पड़ता है. चमकता आईना इसलिए चमकता है कि इसमें सच बाते लिखी जाती हैं.
    हर वर्ष समारोह आयोजन की घोषणा: धन्यवाद ज्ञापन के क्रम में चमकता आईना के प्रबंध निदेशक ब्रजभूषण सिंह ने घोषणा की कि आज के आयोजन से उन्हें काफी ऊर्जा और आत्मबल मिला है. इस समोराह का आयोजन वे हर्ष वर्ष करेंगे और बेहतर ढंग से करेंगे. इस कार्यक्रम का सुंदर संचालन साहित्यकार डा. कल्याणी कबीर ने किया. मंच के संचालन में चमकता आईना के संपादक जयप्रकाश ने भी सहयोग किया.चमकता आईना के प्रकाशक विनय शुक्ल भी इस मौके पर मौजूद थे।
    चमकता आईना एलुमनी का सम्मान: मुख्य अतिथि अर्जुन मुंडा ने इस मौके पर चमकता आईना परिवार के पुराने साथियों का शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया. इसमें वे सारे लोग शामिल थे जो आज भी इस परिवार से जुड़े हैं या कालक्रम में कैरियर बनाने के लिए किसी दूसरे अखबार में चले गए. इस कार्य की मंच से सबों ने सराहना की. खास पत्रकारों ने. कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों को पुष्पगुच्छ, प्रतीक चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. इस मौके पर विनोद राणा, अरुण कुमार, सत्येंद्र कुमार, अमरेंद्र सिंह ज्ञानी, मोहम्मद दिलदार, गुलाब सिंह, रणजीत कुमार, मनोज कुमार, रंगाधर नंदा, सुदीप सेनगुप्ता, शंतनु पाल, सहित चमकता आईना के आरंभ काल से जुड़े पत्रकारों को सम्मानित मुख्य अतिथि ने किया।
    ्ये भी थे मंच पर मौजूद: पूर्व आरक्षी महानिरीक्षक श्री लक्ष्मण प्रसाद सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता और हर हर महादेव सेवासंघ के अमरप्रीत सिंह काले, भाजपा नेता शैलेन्द्र सिंह, समाजसेवी ब्रह्मर्षि विकास मंच के अध्यक्ष विकास सिंह.

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