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    आपदा में ही हमारे सामर्थ्य की पहचान होती है:डॉ यामिनी कांत महतो

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 31, 2020Updated:July 31, 2020No Comments4 Mins Read
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    आपदा में ही हमारे सामर्थ्य की पहचान होती है:डॉ यामिनी कांत महतो

    जेकेएम कॉलेज , डिग्री सह वीमेंस बी एड और जे के बी एड कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में आज एक अन्तरराष्ट्रीय बेबिनार का आयोजन किया गया । इस बेबिनार में दक्षिण एशिया पर कोविड-19 से पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई । साथ ही शैक्षणिक दृष्टिकोण से आने वाले बदलाव और नई शिक्षा पद्धति पर भी विचार व्यक्त किए गए । इस अंतर्राष्ट्रीय बेबिनार अध्यक्षता कर रहे थे जे के शैक्षणिक संस्थान समूह के सचिव सह संस्थापक डॉक्टर यामिनी कांत महतो । इन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि यह समय समस्याओं से भी भरा हुआ है और संभावनाओं से भी भरा हुआ है. कोविड के कारण बहुत सारे अवांछित परिणाम और परिवर्तन हमारे आसपास नजर आ रहे हैं । सबसे ज्यादा असर शैक्षणिक परिदृश्य पर और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है। इस समय शिक्षाविद की महती जिम्मेदारी बनती है कि वह इससे उबरने का रास्ता दिखाएं। जरूरी है कि हम आपसी विचारों को साझा करें और एक ठोस निष्कर्ष पर पहुंचे ताकि नई पीढ़ी को दिशा निर्देश मिल सके।

    कोविड 19 के कारण सामने आई शैक्षणिक चुनौतियों पर बात करते हुए चेन्नई के प्रोफेसर डॉ वेंकट लक्ष्मण मोनी
    ने कहा कि हमें बदलते हुए परिदृश्य के अनुसार अपने शिक्षण विधियों में भी परिवर्तन लाना होगा क्योंकि ऑनलाइन कक्षा का वातावरण अलग होता है । हमें तकनीक का भी शुक्रगुजार होना चाहिए कि उसके सहारे ही आज हम डिजिटल शिक्षण के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं । यह कहना गलत नहीं होगा कि लाॅक डाउन ने हमारी क्षमताओं को बढ़ाया है और हमें और ज्यादा मजबूत बनाया है ।

    विद्यालय की शिक्षा पर कोविड ने किस प्रकार असर डाला है विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में इस विषय पर बात करते हुए श्रीलंका की शिक्षाविद डाॅ नदीका जो केलानिया विश्वविद्यालय श्री लंका में लेक्चरर हैं , उन्होंने कहा कि बेशक कोविड ने विद्यालय की शिक्षा पर बुरा असर डाला है पर कुछ सकारात्मक प्रभाव भी देखने के लिए मिले हैं । हम सभी कुछ नया सोचने और करने के लिए विवश हुए हैं। साथ ही स्वच्छता के प्रति भी हममें जागरूकता आई है । यह सच है कि हमें साधन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं पर जो कुछ भी संभावनाएं हैं उसके सहारे विद्यालय और महाविद्यालय की शिक्षा को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है।

     

    शिक्षा पर कोविड के प्रभाव पर अपनी जानकारी हमारे साथ साझा करते हुए एनआईटी जमशेदपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रंजीत प्रसाद जी ने कहा कि कि हम अपने वातावरण से ही सीखते हैं । अभी जरूरी है कि बदलते हुए परिदृश्य में हम ऑनलाइन और ऑफलाइन इन दोनों विधियों के बीच संतुलन बैठाने की कोशिश करें। ऑनलाइन कक्षाओं के साथ-साथ सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए विद्यालय में कुछ संख्या में विद्यार्थी जा सकते हैं ताकि शिक्षकों से बातचीत हो सके , विषय वस्तु पर संवाद कायम हो । परीक्षा देने की चुनौती अभी हमारे सामने है और इस पर सोचना होगा।

    साथ ही पंचकोषीय शिक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है ताकि हम एक जिम्मेदार और सर्वांगीण व्यक्तित्व के नागरिक का निर्माण कर सकें । ध्यान देना होगा कि शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं है बल्कि मानव निर्माण की प्रक्रिया है ।

    केरल के डाॅ श्रीकांत नायर ने भी स्कूली शिक्षा से जुड़े विभिन्न आयामों पर अपनी बात
    की । उन्होंने कहा कि आपदाओं में ही व्यवस्था की पहचान होती है। चुनौतियाँ हर जगह है। हमें सामाजिक नियमों का ,सरकारी नियमों का पालन करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ाना होगा । जरूरी है कि सरकार इस परिस्थिति में अपनी मुख्य भूमिका निभाए और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को तकनीकी सुविधाओं से लैस करे। सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों के हर प्रकार की जरूरत को पूरा करना भी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए ।कोविड से उपजी परेशानियों को सामूहिक तौर पर ही हल किया जा सकता है क्योंकि यह व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती है।

    इस अन्तरराष्ट्रीय बेबिनार को सफल बनाने में कोऑर्डिनेटर डाॅक्टर सोनाली राय , प्रिंसिपल डाॅक्टर कल्याणी कबीर , प्रिंसिपल डॉ पूनम कुमारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा । स्वागत गान और गीत प्रोफेसर श्यामली दत्ता ने प्रस्तुत किया। बेबिनार में तकनीकी रूप से कमलेंदु राय और पूजा गिरी सहायक रहे । बेबिनार का संचालन प्रिंसिपल डाॅक्टर कल्याणी कबीर ने और धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्षा डाॅक्टर मौसमी महतो ने किया ।
    कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान के साथ किया गया ।
    इस बेबिनार में जे के शैक्षणिक संस्थान से जुड़े सभी व्याखयाताओं और बड़ी संख्या में
    विद्यार्थियों ने भी भाग लिया ।

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