
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
बारीडीह में तीन घंटे तक गूंजा ‘बाबा नाम केवलम’ अखंड कीर्तन के माध्यम से शहर में एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। जमशेदपुर के बारीडीह जॉगर्स पार्क के समीप आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और तीन घंटे यानी एक प्रहर तक निरंतर कीर्तन का आनंद लिया। इस कीर्तन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनमानस को मानसिक शांति और ईश्वरीय प्रेम का मार्ग दिखाना था।
बारीडीह में तीन घंटे तक गूंजा ‘बाबा नाम केवलम’ अखंड कीर्तन का महत्व
कीर्तन की समाप्ति के पश्चात, प्रख्यात आचार्य कल्याणमित्रानंद अवधूत ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ईश्वर की प्राप्ति का सबसे सरल, सुगम और प्रभावी माध्यम ‘बाबा नाम केवलम’ कीर्तन ही है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति बाहरी सुखों के पीछे भाग रहा है, लेकिन वास्तविक शांति केवल भीतर ही मिलती है।
आचार्य ने विस्तार से समझाया कि कैसे नियमित कीर्तन करने से मनुष्य अशांति, तनाव और चिंता के नकारात्मक घेरे से मुक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह साधना मन, शरीर और आत्मा को एक साथ एकाग्र करने में सहायक होती है। जब हम पूर्ण भक्ति के साथ ईश्वर का नाम लेते हैं, तो हमारे भीतर की सकारात्मक ऊर्जा जागृत होती है। इसके नियमित अभ्यास से संकल्पशक्ति, विचारशक्ति और कार्यशक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कीर्तन व्यक्ति में प्रेम, सहानुभूति, सेवा और उच्च आध्यात्मिक चेतना का विकास करता है। जब हम सामूहिक रूप से एक ही धुन में ईश्वर का नाम जपते हैं, तो वह वातावरण पूरी तरह से शुद्ध हो जाता है। उन्होंने कहा कि कीर्तन के माध्यम से मन को संयमित कर परम शांति और ईश्वर के प्रति गहरे जुड़ाव का अनुभव किया जा सकता है। यह साधना व्यक्ति को बाहरी दिखावे से दूर रखकर आंतरिक स्वतंत्रता प्रदान करती है।
इसके अलावा, समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी सामंजस्य को मजबूत करने में भी इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बारीडीह के इस अखंड कीर्तन ने न केवल उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आचार्य ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर नियमित साधना करें। इससे न केवल उनका व्यक्तित्व निखरेगा, बल्कि वे समाज के लिए भी एक प्रेरक शक्ति बन पाएंगे। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित भक्तों के चेहरों पर जो संतोष और आनंद दिखाई दिया, वह कीर्तन की शक्ति का प्रमाण था।
कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया और सभी ने एक साथ मिलकर ईश्वर की असीम कृपा के लिए प्रार्थना की। जमशेदपुर में इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन होता रहता है, जिससे शहर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना बनी रहती है। यह कीर्तन कार्यक्रम बारीडीह के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता की कामना की गई है।
- ईश्वरीय साधना का महत्व और लाभ।
- तनाव मुक्ति में कीर्तन की भूमिका।
- आचार्य कल्याणमित्रानंद अवधूत का मार्गदर्शन।
- सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागृति।

