देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद जनगणना 2027 आखिरकार अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है। कोरोना महामारी के कारण लंबित इस महाअभियान की तैयारियां अब जोर-शोर से चल रही हैं और इसका दूसरा चरण आगामी 25 जनवरी 2027 से प्रारंभ होने जा रहा है। यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी क्योंकि पहली बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी और लगभग 95 वर्षों के अंतराल के बाद जातिगत गणना को भी इसमें शामिल किया गया है। इस विशाल अभियान के लिए केंद्र सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है और लगभग 30 लाख प्रगणक व पर्यवेक्षक घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे।
जनगणना 2027 का चरणबद्ध कार्यक्रम
जनगणना का पहला चरण यानी मकानों की सूचीकरण एवं गणना की प्रक्रिया जून 2026 में पूरी हो चुकी है। अब दूसरे चरण में घर-घर जाकर परिवारों और व्यक्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारियां जुटाई जाएंगी। इस दौरान लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें परिवार के सदस्यों की पहचान, शिक्षा, भाषा, रोजगार, आर्थिक गतिविधियां, जन्म, पलायन और अन्य सामाजिक जानकारियां शामिल होंगी।
डिजिटल नवाचार और स्व-गणना की सुविधा
इस बार नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा। सरकारी अधिसूचना के अनुसार 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक लोग निर्धारित पोर्टल पर अपनी जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी तक प्रगणक घर-घर जाकर जनगणना का काम करेंगे। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है। यानी इस समय देश में मौजूद लोगों की स्थिति को आधार मानकर आंकड़े तैयार किए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के समन्वय से संचालित होगी।
1931 के बाद ऐतिहासिक जातिगत गणना
जनगणना 2027 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता जातिगत गणना है। आजादी के बाद पहली बार नियमित जनगणना में जातियों से संबंधित आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। इससे देश में विभिन्न जातियों की आबादी और सामाजिक स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है। इससे पहले वर्ष 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान जातिगत जनगणना हुई थी। यह कदम सामाजिक न्याय और नीति निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अधिक जानकारी के लिए आप भारत की जनगणना का इतिहास देख सकते हैं।
विशेष राज्यों के लिए अलग व्यवस्था
विधानसभा चुनाव और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ राज्यों तथा बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में चुनावी परिस्थितियों के मद्देनजर कार्यक्रम में बदलाव की बात कही गई है। वहीं जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में जनगणना अलग समय पर कराई जाएगी।
बजट, मानव संसाधन और गोपनीयता प्रावधान
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में सहयोग करेंगी। लगभग 30 लाख प्रगणक और पर्यवेक्षक इस विशाल अभियान में लगाए जाएंगे। जनगणना के दौरान नागरिकों से प्राप्त व्यक्तिगत जानकारियों की गोपनीयता सुनिश्चित करने का प्रावधान है। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत इन आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य के रूप में भी नहीं किया जा सकेगा।
कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना स्थगित कर दी गई थी। अब करीब छह वर्ष बाद देश में जनगणना की प्रक्रिया नए स्वरूप में शुरू होने जा रही है। डिजिटल तकनीक, स्व-गणना और जातिगत आंकड़ों के समावेश के कारण जनगणना 2027 को देश की जनसांख्यिकीय तस्वीर समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह अभियान न केवल आंकड़े एकत्र करेगा बल्कि भविष्य की योजनाओं का आधार भी तैयार करेगा। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक तंत्र की कुशलता से यह ऐतिहासिक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होगा।

