बेलगावी (कर्नाटक), 27 अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि गन्ना किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच उनकी मध्यस्थता में हुई बातचीत सफल रही है।
शिवकुमार ने बताया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि केंद्र सरकार द्वारा चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) तय किए जाने के बाद किसानों को दिए जाने वाले गन्ने के मूल्य पर फैसला किया जाएगा।
गन्ना किसान प्रति टन गन्ने पर 6,000 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, किसान और मिल मालिक इस प्रस्ताव पर आपस में चर्चा करने के बाद दो दिन के भीतर अपने अंतिम फैसले की घोषणा करेंगे।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘किसानों और चीनी मिलों, दोनों का अस्तित्व बना रहना चाहिए। सरकार के लिए किसानों की आजीविका बहुत महत्वपूर्ण है।’’
बेलगावी स्थित सर्किट हाउस और सुवर्ण विधान सौध में लगभग 10 घंटे तक चली पांच दौर की बातचीत के बाद इस मुद्दे पर सहमति बनी। यह बातचीत सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे शुरू हुई और मध्यरात्रि को समाप्त हुई।
शिवकुमार ने कहा कि किसानों ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ बातचीत की थी, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया और चीनी मिल मालिक इस बात पर सहमत हुए कि केंद्र सरकार द्वारा चीनी का एमएसपी तय किए जाने के बाद किसानों को दिए जाने वाले गन्ने के मूल्य पर फैसला किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘किसान और चीनी मिल मालिक समझौते के करीब पहुंच गए हैं। हम उनके समर्थन में उनके साथ खड़े रहेंगे। वे केंद्र सरकार से भी बात करेंगे और हम भी केंद्र से बातचीत करेंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों ने प्रस्ताव पर आपस में चर्चा करने और अंतिम निर्णय पर पहुंचने के लिए दो दिन का समय मांगा है।
उन्होंने कहा, ‘‘आंदोलन का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल आया है। हम किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए आगे आए हैं और मैं केंद्र सरकार के साथ किसी भी समय बातचीत करने के लिए तैयार हूं।’’
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय मंत्री किसानों से किए गए अपने वादों को पूरा करेंगे।
सोमवार को हुई चर्चा में नौ मंत्रियों और करीब 70 विधायकों ने हिस्सा लिया।
बैठकों में 80 में से 79 चीनी मिल के प्रतिनिधियों के साथ किसान नेता भी शामिल हुए।

