उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक ऐसी दर्दनाक दास्तान सामने आई है जहां अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की सजा एक महिला को 15 साल बाद भी भुगतनी पड़ रही है। हुमैरा साबिर ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर असलम से निकाह किया था, लेकिन आज वह दो मासूम बच्चों के साथ तन्हाई, बेबसी और आर्थिक संकट के अंधेरे में जीने को मजबूर है। यह कहानी केवल एक टूटे रिश्ते की नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच पर करारा तमाचा है जो प्रेम विवाह करने वाली महिलाओं को ताउम्र कटघरे में खड़ा रखती है।
परिवार की बगावत और मायके का छूटा साथ
करीब 15 साल पहले हुमैरा ने असलम का हाथ थामा था। दोनों एक ही मजहब से ताल्लुक रखते थे, लेकिन जातिगत अंतर और परिवार की असहमति उनके रिश्ते में दीवार बन गई। हुमैरा के इस फैसले से उसका मायका नाराज हो गया। मां और भाई से उसके रिश्ते टूट गए। जिस भाई के साथ बचपन की यादें जुड़ी थीं, उसने भी उससे दूरी बना ली। परिवार की चौखट, जो मुश्किल वक्त में किसी बेटी का सबसे बड़ा सहारा होती है, हुमैरा के लिए हमेशा के लिए बंद हो गई। इस सामाजिक बहिष्कार ने हुमैरा को अकेला कर दिया, जिसका फायदा आगे चलकर उसके पति ने उठाया।
अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की सजा: प्यार से प्रताड़ना तक का सफर
शुरुआत में जिस रिश्ते को हुमैरा ने प्यार और विश्वास के साथ अपनाया था, उसमें धीरे-धीरे कड़वाहट बढ़ने लगी। हुमैरा के मुताबिक, असलम छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज और मारपीट करने लगा। उसकी दूसरी महिलाओं से नजदीकियां बढ़ीं और उसने दूसरा निकाह भी कर लिया। जिस घर को बसाने के लिए हुमैरा ने अपने परिवार तक से दूरी बना ली थी, उसी घर में उसका रहना मुश्किल हो गया। घरेलू हिंसा का यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा, लेकिन मायके का सहारा न होने के कारण हुमैरा सब सहती रही।
तलाक के बाद भी नहीं थमा जुल्म का सिलसिला
जब जुल्म सहन करना मुश्किल हो गया, तो हुमैरा ने अपने बेटे और बेटी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए असलम से अलग होने का फैसला किया। मामला थाने पहुंचा और पुलिस के सामने तलाक के कागजात पर हस्ताक्षर हुए। उसे उम्मीद थी कि इस फैसले के बाद वह अपने बच्चों के साथ सुकून से जिंदगी गुजार सकेगी, लेकिन उसकी मुश्किलें कम नहीं हुईं। हुमैरा का आरोप है कि अलग होने के बाद भी असलम बच्चों से मिलने के बहाने उसके घर आता और उसके साथ मारपीट करता था। वह रुपये मांगता, इनकार करने पर घरेलू सामान तोड़ देता और घर में रखी जमा-पूंजी छीन लेता था।
हालिया वारदात: 80 हजार नकद और जेवर लेकर फरार
हाल ही में असलम पर आरोप है कि वह जबरन घर में घुसा और बच्चों की परवरिश के लिए जमा किए गए 80 हजार रुपये नकद तथा लगभग इतनी ही कीमत के जेवर लेकर मुंबई चला गया। इस घटना ने हुमैरा और उसके दोनों बच्चों को फिर गहरे संकट में डाल दिया है। जिन पैसों से बच्चों की फीस, दवा और जरूरतें पूरी होनी थीं, वे भी अब उसके पास नहीं हैं। हुमैरा का कहना है कि उसने कई बार पुलिस से शिकायत की, लेकिन उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली।
समाज और प्रशासन के सामने खड़े सवाल
हुमैरा की कहानी सिर्फ एक टूटे रिश्ते की कहानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच पर भी सवाल है, जो मुश्किल में फंसी महिला को सहारा देने के बजाय उसके पुराने फैसले का ताना देती है। प्रेम विवाह करना किसी महिला के साथ हिंसा, अपमान या आर्थिक शोषण को जायज नहीं ठहराता। रिश्ते में असहमति हो सकती है, लेकिन किसी को प्रताड़ित करने का अधिकार किसी को नहीं है। हुमैरा ने कभी अपने प्यार पर भरोसा करके परिवार से बगावत की थी। आज उसे अपने बच्चों के भविष्य और सुरक्षा की चिंता है।
सवाल यह है कि क्या अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की सजा किसी महिला को जिंदगी भर भुगतनी चाहिए? परिवार की नाराजगी अपनी जगह हो सकती है, लेकिन संकट में किसी बेटी का साथ छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं है। हुमैरा को अब सहानुभूति के साथ-साथ सुरक्षा, न्याय और अपने बच्चों के लिए स्थिर भविष्य की जरूरत है। उसकी कहानी समाज और प्रशासन दोनों के सामने यह सवाल रखती है कि घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की शिकायतों को आखिर कब तक महज पारिवारिक विवाद समझकर नजरअंदाज किया जाता रहेगा? पीड़ित महिलाएं राष्ट्रीय महिला आयोग की हेल्पलाइन पर भी संपर्क कर सकती हैं।

