लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर में गोलमुरी उत्कल समाज के 1991 बैच के विद्यार्थियों ने शिक्षकों को किया सम्मानित, यह आयोजन विद्यालय से मैट्रिक पास होने के 35 वर्ष पूरे होने की खुशी में किया गया। भालुबासा स्थित चित्रगुप्त विकास भवन में आयोजित इस पारिवारिक मिलन समारोह में देश-विदेश में कार्यरत 40 से अधिक पूर्व विद्यार्थियों ने अपने परिवार सहित उत्साहपूर्वक भाग लिया।
गोलमुरी उत्कल समाज के 1991 बैच के विद्यार्थियों ने शिक्षकों को किया सम्मानित: 35 वर्षों का उत्सव
समारोह का मुख्य आकर्षण गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन रहा। पूर्व विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें अंगवस्त्र और फूलमाला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक गगन बिहारी स्वाई, वर्तमान प्रधानाध्यापक अवनी कुमार दत्ता सहित कई अन्य वरिष्ठ शिक्षक उपस्थित थे।
भावुक हुए गुरुजन, साझा की पुरानी यादें
सम्मान पाकर शिक्षकगण अत्यंत प्रसन्न और भावुक नजर आए। पूर्व प्रधानाध्यापक गगन बिहारी स्वाई ने अपने संबोधन में कहा कि 35 वर्ष बाद अपने शिष्यों को सफल और संस्कारी नागरिक के रूप में देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने पुराने दिनों की यादें साझा करते हुए विद्यार्थी जीवन की शरारतों और अनुशासन के किस्से सुनाए, जिससे पूरा माहौल हंसी-ठहाकों और भावुकता से भर गया।
वर्तमान प्रधानाध्यापक अवनी कुमार दत्ता ने विद्यालय की वर्तमान प्रगति और उपलब्धियों से पूर्व छात्रों को अवगत कराया। उन्होंने पूर्व छात्रों से विद्यालय के विकास में योगदान देने का आह्वान भी किया। इस अवसर पर पूर्व छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे गुरुजनों की दी हुई शिक्षा ने उनके करियर और जीवन को दिशा दी।
देश-विदेश से जुटे पूर्व छात्र
इस मिलन समारोह की खासियत यह रही कि इसमें 40 से अधिक पूर्व छात्र न केवल जमशेदपुर बल्कि देश के विभिन्न महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और विदेशों से भी पहुंचे थे। कई पूर्व छात्र तो अपने पूरे परिवार के साथ आए थे, जिससे यह आयोजन एक वृहद पारिवारिक उत्सव में तब्दील हो गया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस तरह के आयोजन की योजना पिछले एक वर्ष से बन रही थी। व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया के माध्यम से बैच के साथियों से संपर्क साधा गया। चित्रगुप्त विकास भवन को खासतौर पर सजाया गया था, जहां पुरानी तस्वीरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिन्हें देख सभी पुरानी यादों में खो गए।
गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल
यह आयोजन आधुनिक दौर में गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल प्रस्तुत करता है। जहां आज रिश्तों की डोर कमजोर पड़ती जा रही है, वहीं गोलमुरी उत्कल समाज के इन पूर्व छात्रों ने साबित कर दिया कि गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान समय के साथ और गहरा होता जाता है। शिक्षकों को सम्मानित करने की यह परंपरा नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
समारोह के अंत में सभी पूर्व छात्रों ने सामूहिक भोज का आनंद लिया और फिर मिलने का वादा करके विदा हुए। इस आयोजन ने न केवल पुराने दोस्तों को मिलाया बल्कि गुरुजनों का आशीर्वाद भी सबको प्राप्त हुआ। शिक्षा और संस्कार के इस अनूठे संगम की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। अधिक जानकारी के लिए झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

