गांव में स्कूल, शहर में घर…और हाउस अलाउंस सरकार का
*मास्टर साहब कहां रहते हैं? अब विभाग लेगा पूरा हिसाब!*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
सरायकेला-खरसावां जिले के सरकारी विद्यालयों में पदस्थापित कुछ शिक्षकों के कार्यस्थल से काफी दूर रहने और इसके बावजूद सरकारी आवास अथवा हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) का लाभ लेने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों की ओर से दावा किया गया है कि कुछ शिक्षक अपने विद्यालय से 30 से 50 किलोमीटर तक दूर जमशेदपुर और आदित्यपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं। मामले को लेकर शिक्षा विभाग ने अब आवासीय पते और उपस्थिति की जांच की तैयारी शुरू कर दी है।
बताया गया है कि लंबी दूरी से रोजाना आवागमन करने वाले कुछ शिक्षकों के विद्यालय पहुंचने में देरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि शिक्षक नियमित रूप से समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते हैं तो इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले का दूसरा पहलू उन शिक्षकों का है, जो लंबे समय से विभागीय कार्यालयों में प्रतिनियोजन पर रहने की बात कही जा रही है। अभिभावकों ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर उनके वास्तविक आवासीय पते, विद्यालय में उपस्थिति, एचआरए भुगतान और प्रतिनियोजन की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसइ) अमित कुमार ने कहा है कि मुख्यालय से आठ किलोमीटर से अधिक दूर अथवा दूसरे शहर में रहकर कार्य करने वाले शिक्षकों की सूची प्राप्त की जा रही है। सूची मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।
अब निगाह इस बात पर है कि जांच में कितने शिक्षक निर्धारित कार्यस्थल से दूर रहते पाए जाते हैं और कितनों के आवास, उपस्थिति अथवा भत्ते से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितता सामने आती है। विभागीय जांच की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

