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    स्थापना के 11 वर्ष बाद भी बखरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय को पूर्ण दर्जा नहीं मिला

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 19, 2026No Comments3 Mins Read
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    बखरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय
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    लेखक: नितेश सिंह राजपूत

    बखरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय की स्थापना को 11 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसे अब तक पूर्ण दर्जा नहीं मिल सका है।

    बखरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय में न्यायिक पदों का अभाव

    बखरी अनुमंडल में अनुमंडल व्यवहार न्यायालय की स्थापना के 11 वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक यहां अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी (एसडीजेएम) की प्रतिनियुक्ति नहीं हो सकी है और न ही इसे पूर्ण दर्जा प्राप्त हुआ है। जिसके कारण अनुमंडल क्षेत्र के लाखों लोगों को आज भी त्वरित एवं सुलभ न्याय की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    सामाजिक कार्यकर्ता राजेश अग्रवाल ने इस बाबत आज बिहार सरकार के मुख्यमंत्री, विधि मंत्री सहित हाई कोर्ट के न्यायधीश व बेगूसराय के निरीक्षी जस्टिस अजीत कुमार को पत्र के माध्यम से इस जरूरी समस्या से अवगत कराया है।

    पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में बखरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय महज एक सब जज तथा एक मुंशीफ के सहारे संचालित हो रहा है। न्यायिक व्यवस्था के विस्तार के बावजूद यहां एसडीजेएम, सेशन जज आदि की पदस्थापना नहीं होने से विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई, बेल आदि के लिए लोगों को अभी भी करीब 35 किलोमीटर दूर जिला न्यायालय का रुख करना पड़ता है। जी आर का पावर भी बखरी न्यायालय को प्राप्त नहीं है।

    विशेषकर गंभीर आपराधिक मामलों, जमानत (बेल) सहित अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं के लिए लोगों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त खपत होती है।

    स्थानीय लोगों का भी कहना है कि अनुमंडल न्यायालय की स्थापना का मूल उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को उनके नजदीक न्याय उपलब्ध कराना था। लेकिन एक दशक बाद भी आवश्यक न्यायिक पदों की पूर्ण व्यवस्था नहीं होने से यह उद्देश्य पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है। लोगों ने उच्च न्यायिक स्तर पर पहल कर बखरी अनुमंडल न्यायालय में जल्द से जल्द एसडीजेएम की प्रतिनियुक्ति सहित आवश्यक न्यायिक पदों को भरने की मांग की है।

    न्यायिक व्यवस्था पर प्रभाव

    बखरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय में आवश्यक पदों की कमी का सीधा असर क्षेत्र की जनता पर पड़ रहा है। त्वरित न्याय के अधिकार से वंचित लोगों को छोटे-छोटे मामलों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यह स्थिति न्यायपालिका की पहुंच को सीमित करती है और आम नागरिकों में निराशा पैदा करती है।

    सरकारी पहल की आवश्यकता

    इस समस्या के समाधान के लिए बिहार सरकार और उच्च न्यायालय को संयुक्त रूप से ठोस कदम उठाने होंगे। न्यायिक पदों को जल्द भरने के साथ-साथ जी आर पावर प्रदान करने से स्थानीय स्तर पर ही मामलों का निपटारा संभव हो सकेगा। अधिक जानकारी के लिए बिहार सरकार का आधिकारिक पोर्टल देखें।

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