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    Home » तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग
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    तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 18, 2026No Comments3 Mins Read
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    उच्चस्तरीय जांच
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की तुरामडीह खदान में अनियमितताओं के आरोपों ने खान सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश सिंह ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

    यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों, कंपनी की सामग्री के कथित उपयोग तथा भूमिगत और सतही कार्यों को लेकर शिकायतों ने कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और खान सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश सिंह ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

    शिकायत के अनुसार, 24 नवंबर 2025 को जारी कार्यादेश संख्या GEMC-511687761339113 में तुरामडीह खदान के भूमिगत विविध सिविल कार्यों के लिए करीब 1.39 करोड़ रुपये का कार्यादेश दिया गया था। आरोप है कि निर्धारित भूमिगत कार्यों के बजाय सड़क निर्माण, समतलीकरण, बैरिकेडिंग सहित अन्य सतही कार्य कराए गए। ऐसे में कार्यादेश की शर्तों, कार्य की माप और भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग की गई है।

    शिकायत में भूमिगत खदान में चट्टान और छत को सहारा देने के लिए इस्तेमाल होने वाली रॉक बोल्ट (चट्टान सहारा सामग्री) के कथित तौर पर सड़क अथवा अन्य सतही कार्यों में इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इसकी वास्तविकता जानने के लिए सामग्री निर्गमन पंजिका, भंडार पंजिका, सामग्री मांग-पत्र, स्थल अभिलेख और कार्य माप पुस्तिका का मिलान कराने की मांग की गई है।

    शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पिछले करीब तीन वर्षों में समान प्रकृति के कार्यों में भी अनियमितता की आशंका है। इसलिए संबंधित कार्यादेशों, निविदा प्रक्रिया, कार्य माप पुस्तिका, भुगतान बिल, सामग्री निर्गमन, प्रवेश-निकास अभिलेख, श्रमिक उपस्थिति पंजिका और भुगतान संबंधी अभिलेखों का विशेष लेखा परीक्षण कराने की मांग की गई है।

    ठेका व्यवस्था में कथित पक्षपात तथा बार-बार समान ठेकेदारों को काम मिलने के आरोपों की भी जांच की मांग की गई है। साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका, उनकी पदस्थापना एवं स्थानांतरण का इतिहास तथा कार्यादेश से लेकर भुगतान स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की बात कही गई है।

    सतीश सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि अभिलेखों की जांच और स्थल सत्यापन के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने लाना है। उन्होंने यूसीआईएल के सतर्कता विभाग अथवा कंपनी के उच्चस्तरीय स्तर से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय हो और यदि आरोप निराधार हों तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट हो।

    उच्चस्तरीय जांच में इन बिंदुओं की हो समीक्षा

    • पिछले तीन वर्षों के संबंधित कार्यादेशों का विशेष लेखा परीक्षण।
    • भूमिगत और सतही कार्यों का स्थल पर भौतिक सत्यापन।
    • रॉक बोल्ट सहित कंपनी की सामग्री के निर्गमन और वास्तविक उपयोग का मिलान।
    • कार्यादेश, कार्य-विवरण, कार्य माप पुस्तिका और भुगतान बिलों की जांच।
    • निविदा एवं ठेका आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा।
    • संबंधित अधिकारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण का इतिहास खंगाला जाए।
    • बिल तैयार करने से लेकर भुगतान स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया की जांच।
    • खान सुरक्षा से जुड़े आरोपों की तकनीकी जांच।
    • यूसीआईएल के सतर्कता विभाग अथवा उच्चस्तरीय स्वतंत्र टीम से जांच।

    इस मामले में यूसीआईएल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जानकारी उपलब्ध है। जांच के नतीजे आने तक क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है। उच्चस्तरीय जांच की मांग ने स्थानीय प्रशासन और खनन अधिकारियों पर दबाव बढ़ा दिया है।

    उच्चस्तरीय जांच खान सुरक्षा ठेका कार्य तुरामडीह माइंस यूसीआईएल
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