सांसद बनाम सफेदपोश कारोबारी की कहानी में अब कई सवाल!
देवानंद सिंह
“हम तो शक्ति की पूजा करते हैं…” कभी इस जुमले के जरिए सियासत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले आरएसएस प्रमुख के सियासी साए में आगे बढ़े एक शिष्य की दौलत, रसूख और कारोबारी साम्राज्य को लेकर अब आदित्यपुर के औद्योगिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल यह है कि आखिर इस कहानी के तार कहां-कहां तक जुड़े हैं?
मामला सिर्फ एक कारोबारी और सांसद के बीच कथित तनातनी का नहीं है। औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और खरीद-फरोख्त, उद्योग संगठनों की भूमिका, बासुकीनाथ धर्मशाला प्रकरण और राजनीतिक संरक्षण के आरोप इन तमाम सवालों ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सांसद बनाम सफेदपोश कारोबारी की इस कथित जंग में असली खिलाड़ी कौन है? कौन किसके करीब था और फिर अचानक दूरियां क्यों बढ़ीं? क्या यह महज कारोबारी मतभेद है या इसके पीछे सियासत, सत्ता और प्रभाव का कोई बड़ा खेल चल रहा है?
और जिस समय आदित्यपुर के हजारों उद्यमी सड़क, बिजली, जलजमाव, सुरक्षा और प्रशासनिक अड़चनों से जूझ रहे हैं, उस समय पर्दे के पीछे कौन-सी पटकथा लिखी जा रही है यह सवाल भी अब उठने लगा है।
आरोप गंभीर हैं, लेकिन सवालों के जवाब दस्तावेज और जांच से ही सामने आएंगे।
सांसद खामोश क्यों हैं? कारोबारी पक्ष क्या कहता है? और इस पूरे खेल में किसका फायदा और किसका नुकसान हुआ?
धैर्य रखिए… कहानी अभी बाकी है। बहुत जल्द किश्तवाड़ से इस पूरे मामले की अगली किश्त सामने आएगी।

