लेखक: देवानंद सिंह
बिहार सरकार ने विद्यार्थियों की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समयबद्ध समाधान के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ की शुरुआत कर एक जरूरी पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली के बिदुपुर स्थित बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज में इसकी शुरुआत की। हर महीने के चौथे मंगलवार को राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में लगने वाले इन शिविरों में छात्र परीक्षा, शैक्षणिक व्यवस्था, छात्रावास, पेयजल, शौचालय, कैंटीन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें सीधे अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। सरकार ने शिकायतों के अधिकतम 30 दिनों में अंतिम निस्तारण का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ और हेल्पलाइन नंबर 1100 शुरू करना भी सकारात्मक कदम है।
विद्यार्थी सहयोग शिविर: विस्तार और उद्देश्य
दरअसल, बिहार में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की समस्याएं केवल कॉलेज की बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं। भर्ती परीक्षाओं में देरी, प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं, परीक्षाओं का रद्द होना और परिणाम जारी करने में विलंब जैसे मुद्दे युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े हैं। इन समस्याओं के कारण विद्यार्थियों में निराशा और असुरक्षा का भाव पैदा होना स्वाभाविक है। ऐसे समय में सरकार की ओर से शिकायतों को सुनने के लिए एक नियमित मंच उपलब्ध कराना स्वागत योग्य है।
शिकायत निवारण में पारदर्शिता जरूरी
लेकिन किसी भी व्यवस्था की असली परीक्षा उसके गठन में नहीं, बल्कि उसके परिणाम में होती है। शिविर में शिकायत दर्ज हो जाना पर्याप्त नहीं है। छात्र यह जानना चाहते हैं कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई कब होगी, जिम्मेदार अधिकारी कौन है और समाधान की अंतिम स्थिति क्या है। इसलिए 30 दिनों की समयसीमा के साथ प्रत्येक शिकायत की ऑनलाइन ट्रैकिंग, जिम्मेदारी तय करने और निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से फीडबैक लेने की व्यवस्था भी प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए।
परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल
विशेष रूप से परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता देनी होगी। लाखों युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। एक परीक्षा में देरी या रद्दीकरण उनके समय, मेहनत और आर्थिक संसाधनों पर भारी पड़ता है। पेपर लीक जैसी घटनाएं तो पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती हैं। इसलिए विद्यार्थियों की समस्याओं को केवल शिकायत निवारण के नजरिये से नहीं, बल्कि युवा भविष्य और प्रशासनिक विश्वसनीयता के सवाल के रूप में देखना होगा।
राजनीतिक सहमति की दरकार
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक और परिणाम में विलंब जैसे मुद्दे उठाया जाना भी इसी व्यापक चिंता को सामने लाता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर छात्रों से जुड़े इन सवालों का समाधान जरूरी है। बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस पहल की जानकारी उपलब्ध है।
निष्कर्ष: आश्वासन नहीं, व्यवस्था चाहिए
सरकार ने अच्छी शुरुआत की है। अब जरूरत इस बात की है कि ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ महज एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर न रह जाए। यदि विद्यार्थियों की शिकायतें सुनी जाएं, समय पर कार्रवाई हो, कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक हो और लापरवाही के लिए जवाबदेही तय की जाए, तभी यह पहल भरोसा पैदा कर सकेगी। बिहार के युवाओं को आश्वासन नहीं, निष्पक्ष व्यवस्था, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और समय पर परिणाम चाहिए। यही इस नई पहल की सबसे बड़ी कसौटी भी होगी।

