Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » चार माह का गर्भ गिरने पर सिद्धेश हॉस्पिटल में हंगामा, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप.
    Breaking News Headlines अपराध कारोबार खबरें राज्य से चाईबासा जमशेदपुर झारखंड सरायकेला-खरसावां हजारीबाग

    चार माह का गर्भ गिरने पर सिद्धेश हॉस्पिटल में हंगामा, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप.

    News DeskBy News DeskAugust 18, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    चार माह का गर्भ गिरने पर सिद्धेश हॉस्पिटल में हंगामा, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप.

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    आदित्यपुर। आदित्यपुर स्थित सिद्धेश हॉस्पिटल में गर्भवती महिला का चार माह का गर्भ गिरने के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने इलाज में कथित लापरवाही, समय पर जांच रिपोर्ट नहीं देखने और अस्पताल के दस्तावेजों में चिकित्सक का नाम बदले जाने का गंभीर आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।

    पीड़ित महिला नमिता डे के परिजनों का आरोप है कि वे डॉ. मनोरमा सिद्धेश से इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन उपचार डॉ. मेघा सिद्धेश द्वारा किया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिला की समुचित निगरानी और समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गयी और बाद में मिसकैरेज की स्थिति उत्पन्न हुई।

    मामला तब और गंभीर हो गया, जब परिजनों ने चिकित्सक से बच्चे की मौत और इलाज में देरी को लेकर सवाल किया। परिजनों के अनुसार, इस दौरान चिकित्सक के व्यवहार को लेकर भी विवाद हुआ। अस्पताल के कागजात में चिकित्सक के नाम को लेकर भी परिजनों ने सवाल उठाये। उनका दावा है कि पहले दर्ज महिला चिकित्सक का नाम बाद में हटा हुआ मिला। अस्पताल कर्मियों द्वारा कथित तौर पर यह कहे जाने से कि “मैडम का नाम था, जिसे हटा दिया गया है”, परिजनों का आक्रोश बढ़ गया।

    परिजनों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि गर्भ में बच्चे की मृत्यु 2 अगस्त को ही हो गयी थी। इसके बावजूद आगे की जांच के लिए 6 सितंबर की तारीख दिये जाने पर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किया कि यदि अल्ट्रासाउंड अथवा चिकित्सकीय जांच से पहले ही बच्चे की स्थिति गंभीर अथवा मृत्यु की जानकारी मिल गयी थी, तो समय रहते आवश्यक उपचार क्यों नहीं किया गया।

    इधर, अस्पताल की ओर से डॉ. मनोरमा सिद्धेश और डॉ. मेघा सिद्धेश ने आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा। चिकित्सकों के अनुसार, नमिता डे 18 मई से उपचार करा रही थीं। उन्हें लगातार पेट दर्द की शिकायत थी और निर्धारित दवाओं व इंजेक्शन के साथ समय-समय पर जांच कराने की सलाह दी गयी थी। डॉक्टरों का कहना है कि जुलाई में निर्धारित स्कैन की तारीख मरीज द्वारा पार कर दी गयी। 2 अगस्त को कराये गये अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट अस्पताल में आयी, लेकिन उसे चिकित्सक को नहीं दिखाया गया।

    चिकित्सकों के मुताबिक, 15 अगस्त को दर्द की शिकायत के बाद महिला अस्पताल पहुंची, जहां जांच के बाद गर्भ में मृत बच्चे को निकाला गया और महिला का उपचार किया गया। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उपचार के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनायी गयी थी।

    हालांकि, परिजनों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अल्ट्रासाउंड अस्पताल में ही कराया गया था और उसकी रिपोर्ट उपलब्ध थी, तो रिपोर्ट देखे बिना अगली तारीख कैसे निर्धारित की गयी और दवाएं कैसे जारी की गयीं? साथ ही, मरीज जिस चिकित्सक को दिखाने आयी थी, उसके बजाय दूसरे चिकित्सक द्वारा उपचार किये जाने को लेकर भी परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा है।

    घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनाव और अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही और दस्तावेजों में कथित बदलाव का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच तथा दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर परिजनों और अस्पताल पक्ष से जानकारी ली है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गर्भ में बच्चे की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इलाज में किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं और अस्पताल के दस्तावेजों में चिकित्सक के नाम को लेकर लगाए गये आरोपों में कितनी सच्चाई है। प्रशासनिक और चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आयेगी।

    चार माह का गर्भ गिरने पर सिद्धेश हॉस्पिटल में हंगामा परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप.
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleकोडरमा में बैंक लूट की साजिश नाकाम, पुलिस मुठभेड़ में अपराधी को लगी गोली; थाना प्रभारी भी घायल
    Next Article गोलमुरी में डिवाइडर से फिर टकराया ट्रक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    Related Posts

    बारिश में डूबी पुरानी पुलिया, सरायकेला-खरसावां मार्ग पर आवागमन ठप

    August 18, 2026

    सोनारी में कर्नाटक पुलिस की छापेमारी, ATM कैश वाहन लूटकांड की जांच तेज

    August 18, 2026

    मानगो नगर निगम की बोर्ड मीटिंग में हंगामा, सफाई व्यवस्था को लेकर आमने-सामने आए समर्थक

    August 18, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    बारिश में डूबी पुरानी पुलिया, सरायकेला-खरसावां मार्ग पर आवागमन ठप

    सोनारी में कर्नाटक पुलिस की छापेमारी, ATM कैश वाहन लूटकांड की जांच तेज

    मानगो नगर निगम की बोर्ड मीटिंग में हंगामा, सफाई व्यवस्था को लेकर आमने-सामने आए समर्थक

    भारी बारिश से लबालब हुआ पनसुआं डैम, ओवरफ्लो पानी ने लिया झरने का रूप; देखने उमड़े लोग

    गुमला में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 5 लाख के इनामी JJMP कमांडर समेत चार उग्रवादी गिरफ्तार

    JSSC CGL रद्द होने के फैसले से अभ्यर्थियों में आक्रोश, प्रोजेक्ट भवन के बाहर बारिश में प्रदर्शन

    सरयू राय 6 सितंबर को झारखंड की शिक्षा व्यवस्था पर जमशेदपुर में करेंगे सेमिनार

    लगातार बारिश से चांडिल डैम का जलस्तर बढ़ा,13 फाटक खोले गए

    गोलमुरी में डिवाइडर से फिर टकराया ट्रक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    चार माह का गर्भ गिरने पर सिद्धेश हॉस्पिटल में हंगामा, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप.

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.