टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) को लेकर केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए उसकी मान्यता निलंबित कर दी. खेल मंत्रालय ने यह कार्रवाई फेडरेशन में सामने आई शासन संबंधी खामियों और निर्धारित समय सीमा के भीतर संगठनात्मक चुनाव नहीं कराने के कारण की है. मंत्रालय ने फेडरेशन की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब को भी संतोषजनक नहीं माना. अब देश में टेबल टेनिस के प्रशासन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ (ITTF) के साथ समन्वय कर अंतरिम व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया गया है.
खेल मंत्रालय के आदेश के अनुसार, TTFI द्वारा निर्धारित समय सीमा में अपने संगठनात्मक चुनाव नहीं कराए गए. चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण फेडरेशन की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए. मंत्रालय ने इस मामले में TTFI को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन प्राप्त जवाब को संतोषजनक नहीं पाया गया. इसके बाद सरकार ने फेडरेशन की मान्यता निलंबित करने का फैसला लिया.
सरकार की इस कार्रवाई के बाद फिलहाल टेबल टेनिस के प्रशासन की जिम्मेदारी अंतरिम व्यवस्था के जरिए संभाली जाएगी. मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ को निर्देश दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ के परामर्श से एक उपयुक्त अंतरिम नियामक तंत्र तैयार करे. इसमें आवश्यकता के अनुसार एक तदर्थ समिति का गठन भी किया जा सकता है. यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक TTFI में नियमों के अनुरूप विधिवत गठित प्रशासनिक ढांचा बहाल नहीं हो जाता.
मंत्रालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि IOA को ITTF के साथ मिलकर देश में टेबल टेनिस के प्रशासन के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे. अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य खिलाड़ियों, प्रतियोगिताओं और खेल की नियमित गतिविधियों पर प्रशासनिक विवादों का असर नहीं पड़ने देना है. साथ ही फेडरेशन को निर्धारित खेल प्रशासनिक नियमों के अनुरूप अपनी व्यवस्था दुरुस्त करने का अवसर भी मिलेगा.
TTFI पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रशासनिक विवादों और आंतरिक मतभेदों को लेकर चर्चा में रहा है. फेडरेशन की मौजूदा अध्यक्ष मेघना अहलावत हैं और वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अध्यक्ष हैं. हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान भी संगठन के भीतर गुटबाजी, निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक कामकाज को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं.
इस साल जून में भारतीय टेबल टेनिस की प्रमुख खिलाड़ी मनिका बत्रा का एशियाई खेलों के चयन को लेकर फेडरेशन के साथ विवाद सामने आया था. उन्हें भारत की टीम में रिजर्व खिलाड़ियों में रखा गया था. बत्रा ने चयन समिति के गठन और उसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए थे. उनका आरोप था कि फेडरेशन के संविधान के अनुसार चयन से जुड़े उपसमिति में सदस्यों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि चयन के लिए नौ सदस्यीय समिति को अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी गई थी.
मनिका बत्रा ने इस मुद्दे को लेकर चुनौती भी दी थी, हालांकि बाद में उन्होंने मानसिक शांति और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी आपत्ति वापस ले ली थी. इस विवाद ने TTFI की चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए थे.
फेडरेशन में प्रशासनिक विवाद नया नहीं है. वर्ष 2022 में भी TTFI के कामकाज को लेकर विवाद के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप की स्थिति बनी थी. इसके बाद इस साल संगठन के भीतर एक और विवाद सामने आया, जब तत्कालीन महासचिव कमलेश मेहता को कथित वित्तीय अनियमितताओं और बिना अनुमति लिए गए निर्णयों के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया था.
कमलेश मेहता के निलंबन के मामले में भी कानूनी हस्तक्षेप हुआ. दिल्ली हाई कोर्ट ने बाद में उनका निलंबन रद्द कर दिया और मामले की सुनवाई के दौरान फेडरेशन के भीतर मौजूद गुटबाजी और प्रशासनिक मतभेदों को भी संज्ञान में लिया. लगातार सामने आते रहे इन विवादों ने फेडरेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल बढ़ाए.
TTFI की मान्यता को लेकर सरकार की कार्रवाई का संबंध राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रशासन और नियमों के पालन से भी है. खेल मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय खेल महासंघों की मान्यता के लिए राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 के प्रावधानों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है. इनमें संगठनात्मक चुनाव, पदाधिकारियों के कार्यकाल और पारदर्शी प्रशासन जैसे मुद्दे शामिल हैं.
सरकार के ताजा फैसले का सीधा असर फेडरेशन के प्रशासनिक अधिकारों पर पड़ेगा. हालांकि, इसका उद्देश्य देश में टेबल टेनिस की खेल गतिविधियों को रोकना नहीं है. अंतरिम व्यवस्था के जरिए प्रतियोगिताओं और खिलाड़ियों से संबंधित कामकाज को जारी रखने की कोशिश की जाएगी. IOA और ITTF के समन्वय से बनने वाली व्यवस्था इस दौरान खेल के प्रशासन को संभालेगी.
फेडरेशन को अब अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को खेल संहिता और निर्धारित नियमों के अनुरूप करने की दिशा में कदम उठाने होंगे. मान्यता तभी बहाल हो सकेगी जब संगठन एक विधिवत और नियमों के अनुरूप शासन व्यवस्था स्थापित करने में सफल होगा. इसके लिए चुनाव प्रक्रिया सहित अन्य प्रशासनिक कमियों को दूर करना महत्वपूर्ण होगा.
सरकार की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारतीय टेबल टेनिस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है. देश के कई खिलाड़ी विश्व और एशियाई स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. ऐसे में फेडरेशन के प्रशासनिक विवादों का समाधान खिलाड़ियों और खेल की दीर्घकालिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
फिलहाल TTFI की मान्यता निलंबित रहने तक भारतीय ओलंपिक संघ और अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ के समन्वय से अंतरिम व्यवस्था संचालित होगी. अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि TTFI अपनी प्रशासनिक खामियों को कितनी जल्दी दूर करता है और नियमों के अनुरूप नई व्यवस्था स्थापित कर फेडरेशन की मान्यता बहाल कराने की दिशा में क्या कदम उठाता है.

