
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में निदेशक (वित्त) के चयन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में कंपनी के पूर्व डीजीएम काली प्रसाद बिसोई ने लोक उद्यम चयन बोर्ड के सचिव को शिकायत भेजकर वर्ष 2021 से 2023 के बीच निदेशक (वित्त) के पद पर चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। शिकायत की प्रतिलिपि केंद्रीय सतर्कता आयोग, खान मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग के अधिकारियों को भी भेजी गई है।
शिकायत में कहा गया है कि सुखेन कुमार बंद्योपाध्याय को वर्ष 2018 में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में निदेशक (वित्त) नियुक्त किया गया था। उनकी सेवानिवृत्ति 30 नवंबर 2021 को होनी थी। इस आधार पर निदेशक (वित्त) के पद की रिक्ति 1 दिसंबर 2021 से संभावित थी। पद को भरने के लिए लोक उद्यम चयन बोर्ड ने 13 जनवरी 2021 को विज्ञापन जारी किया था, जिसकी अंतिम तिथि 25 मार्च 2021 निर्धारित की गई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस विज्ञापन के तहत निदेशक (वित्त) पद के लिए कुल 26 आवेदन प्राप्त हुए थे। बाद में बंद्योपाध्याय ने व्यक्तिगत कारणों से 28 अप्रैल 2021 को पद से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया। खान मंत्रालय ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए 13 सितंबर 2021 से उन्हें कार्यमुक्त कर दिया और निदेशक (वित्त) का अतिरिक्त प्रभार खनिज एवं धातु व्यापार निगम के निदेशक (वित्त) घनश्याम शर्मा को सौंप दिया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 26 आवेदन प्राप्त होने के बावजूद लोक उद्यम चयन बोर्ड ने जनवरी 2021 के विज्ञापन के आधार पर साक्षात्कार नहीं कराया। साथ ही, इस विज्ञापन को रद्द किए जाने संबंधी कोई अधिसूचना या आदेश भी जारी नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने इसी बिंदु को लेकर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है।
इसके बाद लोक उद्यम चयन बोर्ड ने 5 जनवरी 2022 को निदेशक (वित्त) के पद के लिए नया विज्ञापन जारी किया। इसमें रिक्ति की तिथि 14 सितंबर 2021 दर्शायी गई थी। इस विज्ञापन के तहत 27 आवेदन प्राप्त हुए और चार उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए चुना गया। 4 जून 2022 को हुए साक्षात्कार के बाद घनश्याम शर्मा का निदेशक (वित्त) पद के लिए चयन किया गया।
शिकायत में आगे कहा गया है कि चयन के बावजूद शर्मा ने हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में नियमित निदेशक (वित्त) के रूप में 28 फरवरी 2023 को योगदान दिया। इस दौरान वे 27 फरवरी 2023 तक खनिज एवं धातु व्यापार निगम में निदेशक (वित्त) के रूप में अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करते रहे। वहीं, 13 सितंबर 2021 से 28 फरवरी 2023 तक उन्हें हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में निदेशक (वित्त) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
निदेशक (वित्त) के चयन को लेकर तीन प्रमुख सवाल
शिकायतकर्ता ने लोक उद्यम चयन बोर्ड से मुख्य रूप से तीन सवालों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
- पहला: 1 दिसंबर 2021 से संभावित रिक्ति और 26 आवेदन प्राप्त होने के बावजूद जनवरी 2021 के विज्ञापन पर साक्षात्कार क्यों नहीं कराया गया।
- दूसरा: यदि विज्ञापन को रद्द करने का निर्णय लिया गया था तो इसकी औपचारिक अधिसूचना क्यों जारी नहीं की गई।
- तीसरा: सितंबर 2021 से रिक्त पद के लिए जून 2022 में चयन होने के बावजूद चयनित अधिकारी को फरवरी 2023 तक अपने मूल संस्थान में कार्यकाल पूरा करने की अनुमति क्यों दी गई और इस अवधि में हिंदुस्तान कॉपर में अतिरिक्त प्रभार क्यों जारी रखा गया।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों से इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है।
मामले का प्रभाव और आगे की राह
यह प्रकरण हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम में शीर्ष स्तर की नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) की चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल न केवल संस्थान की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियुक्ति में देरी और विज्ञापन रद्द न करने की अधिसूचना जारी न करना प्रक्रियागत खामियों की ओर इशारा करता है।
केंद्रीय सतर्कता आयोग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग जैसी शीर्ष संस्थाओं को शिकायत की प्रति भेजे जाने से इस मामले की गंभीरता बढ़ जाती है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद क्या नतीजे निकलते हैं और क्या भविष्य में ऐसी प्रक्रियागत त्रुटियों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए लोक उद्यम चयन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

