लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: भुइयाडीह स्थित इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती में संभावित अतिक्रमण हटाओ अभियान की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। बुधवार को बड़ी संख्या में बस्तीवासी उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से कार्रवाई पर रोक लगाने तथा राहत देने की मांग की।
इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती का इतिहास और वर्तमान स्थिति
भुइयाडीह क्षेत्र में स्थित इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती दशकों पुरानी है। यहां सैकड़ों परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। ये परिवार दिहाड़ी मजदूरी, रिक्शा चलाना, घरेलू कामकाज जैसे कार्यों से जुड़े हैं। बस्ती में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, लेकिन लोगों ने अपनी मेहनत से आशियाने बनाए हैं। हालिया सर्वेक्षण ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। बस्ती की संकरी गलियों में बच्चों की किलकारियां और बुजुर्गों की चिंता एक साथ सुनाई देती है, जो अब प्रशासनिक कार्रवाई की आहट से सहमी हुई है।
प्रशासनिक कार्रवाई और सर्वेक्षण का विवरण
बस्तीवासियों का कहना है कि वर्ष 2023 में शहर की 86 बस्तियों में कराए गए सर्वेक्षण के दौरान उनके क्षेत्र के 145 मकानों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए चिन्हित किया गया था। इसके बाद संबंधित परिवारों को नोटिस भी जारी किए गए थे। उनका आरोप है कि अब इन मकानों को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। वर्ष 2023 में जिला प्रशासन ने शहर की 86 बस्तियों का सर्वेक्षण कराया था। इसमें भुइयाडीह की इस बस्ती के 145 मकानों को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मानकर चिह्नित किया गया। नोटिस जारी होने के बाद से परिवार दहशत में हैं। 6 अगस्त को दंडाधिकारी नियुक्त कर बुलडोजर चलाने की चर्चा ने आग में घी का काम किया है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने दावा किया कि 6 अगस्त को दंडाधिकारी की नियुक्ति कर बुलडोजर चलाने की योजना बनाई गई है। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक आदेश या पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है।
नेताओं का हस्तक्षेप और पुनर्वास की मांग
प्रदर्शन के दौरान बस्तीवासियों ने वहां से गुजर रहे पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता और मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता का काफिला रोककर अपनी समस्या से अवगत कराया और हस्तक्षेप की मांग की। दोनों नेताओं ने लोगों की बातें सुनीं और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता और मेयर सुधा गुप्ता का काफिला रोककर गुहार लगाई। बन्ना गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि बिना वैकल्पिक आवास के गरीबों को उजाड़ना अन्याय है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास की मांग उठाई। मेयर ने भी सहयोग का आश्वासन दिया।
इस मौके पर पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि यदि लोगों को हटाना आवश्यक है, तो सरकार को पहले प्रधानमंत्री आवास योजना या किसी अन्य सरकारी आवास योजना के तहत प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए बिना गरीब परिवारों के मकान तोड़ना उचित नहीं होगा।
आगे की रणनीति और प्रशासन का रुख
बस्तीवासियों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई पर पुनर्विचार करने तथा उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। बस्तीवासियों ने तय किया है कि अगर कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वे भूख हड़ताल और बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्थानीय विधायक और सांसद से भी हस्तक्षेप की अपील की जाएगी। मामला मानवीय संवेदनशीलता और कानूनी पेचीदगियों के बीच फंसा है।

