लेखक: इंद्र यादव
लोकल ट्रेन में बवाल की ताजा घटना मुंबई सेंट्रल डिवीजन में सामने आई है, जहां दो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों ने एक यात्री के साथ मारपीट की।
इंद्र यादव/मुंबई/मुंबई की लोकल ट्रेनें अपनी ‘लाइफलाइन’ होने के लिए जानी जाती हैं, लेकिन लगता है अब ये ट्रेनें ‘मारपीट’ का नया केंद्र बन गई हैं। हाल ही में मुंबई सेंट्रल GRP की टीम ने दो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। मामला! एक यात्री के साथ सरेआम हुई हाथापाई का!
कहते हैं लोकल में सफर करना अपने आप में एक ‘एडवेंचर’ है, लेकिन ये एडवेंचर तब कड़वा हो गया जब एक यात्री का सामना दो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से हुआ। कहा-सुनी शुरू हुई और बात इतनी आगे बढ़ गई कि नौबत मारपीट तक आ पहुंची। डिब्बे में मौजूद बाकी यात्री तो बस तमाशा देखते रह गए, जैसे ये कोई फ्री का ‘एक्शन ड्रामा’ चल रहा हो।
सूचना मिलते ही मुंबई सेंट्रल GRP की पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। अब पुलिस बड़े इत्मीनान से उनसे पूछ रही है कि आखिर ऐसी कौन सी ‘इमरजेंसी’ आ गई थी कि ट्रेन को रिंग बनाना पड़ा।
भई, लोकल ट्रेन में वैसे ही जगह मिलना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता, ऊपर से अब सफर के दौरान ‘फ्री फाइटिंग’ का लुत्फ भी लेना पड़ रहा है। कमाल है!
पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और घिसे-पिटे तरीके से ‘कानून हाथ में न लेने’ की सलाह भी दे रही है। लेकिन सवाल ये है कि क्या लोकल में सफर करना इतना असुरक्षित हो गया है? GRP भले ही जांच का दावा कर रही है, लेकिन यात्रियों के मन में एक ही सवाल है—अगली बार किसके साथ क्या होगा!
फिलहाल, दोनों आरोपी पुलिस की मेहमाननवाजी का आनंद ले रहे हैं और मुंबई की पब्लिक इंतज़ार कर रही है कि कब इस ट्रेन ‘दंगल’ का पर्दा गिरेगा।
फिलहाल जांच चल रही है, आगे देखिए इस ड्रामे में और क्या मोड़ आते हैं।
लोकल ट्रेन में बवाल: यात्रियों की सुरक्षा खतरे में
मुंबई की लोकल ट्रेनें शहर की जीवन रेखा मानी जाती हैं, जिनमें प्रतिदिन लाखों यात्री सफर करते हैं। भीड़भाड़ वाले डिब्बों में सीट मिलना किसी जंग से कम नहीं होता, और अब इस तरह की मारपीट की घटनाओं ने यात्रियों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
पिछले कुछ महीनों में मुंबई लोकल में छेड़छाड़, चोरी और मारपीट के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। GRP (राजकीय रेलवे पुलिस) और RPF (रेलवे सुरक्षा बल) द्वारा संयुक्त गश्त के बावजूद, अपराधी भीड़ का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दे देते हैं।
वर्ष 2023 में मुंबई डिवीजन में GRP द्वारा दर्ज मारपीट और झगड़े के 1,200 से अधिक मामले सामने आए थे, जिनमें से अधिकांश भीड़भाड़ वाले समय में हुए। इस वर्ष के पहले छह महीनों में ही 600 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो चिंता का विषय है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के व्यक्तियों द्वारा की गई इस तरह की घटना से समुदाय की छवि खराब होती है। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत उन्हें समान अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि वे भीख मांगने या जबरन वसूली पर निर्भर न रहें। महाराष्ट्र सरकार द्वारा चलाई जा रही ट्रांसजेंडर कल्याण योजनाएं इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 139 या GRP कंट्रोल रूम से संपर्क करें। साथ ही, स्टेशनों और ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाने का कार्य जारी है।
रेलवे बोर्ड ने हाल ही में महिला और कमजोर वर्ग के यात्रियों के लिए अलग कोच की संख्या बढ़ाने और पैनिक बटन लगाने की घोषणा की है, जिसका कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
भारतीय रेलवे की सुरक्षा दिशानिर्देशों और यात्री अधिकारों के बारे में अधिक जानकारी के लिए इंडियन रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
इस घटना ने एक बार फिर मुंबई लोकल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि GRP की त्वरित कार्रवाई के बाद ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा और वे निर्भय होकर सफर कर सकेंगे।

