लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
खूंटी के तोरपा थाना क्षेत्र में सोमवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान एक दर्दनाक हादसा हुआ जब रथ पर लगा झंडा 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन से छू गया। इस घटना में रथ को धक्का लगा रहे आठ स्कूली छात्र करंट की चपेट में आ गए, जिनमें से दो छात्रों की मौत हो गई जबकि छह अन्य घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और शोक का माहौल व्याप्त है।
11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन से कैसे हुआ हादसा
यह हादसा तोरपा थाना क्षेत्र के निधिवन रेस्टोरेंट के समीप हुआ। जानकारी के अनुसार, भगवान जगन्नाथ का रथ मौसीबाड़ी में रुका हुआ था। रथ को किनारे करने के लिए श्रीहरि प्लस टू उच्च विद्यालय के आठ छात्र उसे धक्का लगा रहे थे। इसी दौरान रथ पर लगा झंडा ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन से सट गया और पूरे रथ में करंट फैल गया, जिससे सभी छात्र उसकी चपेट में आ गए।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया
स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तत्काल रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने दो छात्रों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान 20 वर्षीय चंदन कुमार और 18 वर्षीय तेजेश्वर महतो के रूप में हुई है। दोनों श्रीहरि प्लस टू उच्च विद्यालय के 12वीं कक्षा के छात्र थे।
परिजनों का बयान और चिकित्सकीय राय
परिजनों के अनुसार, टिफिन के दौरान दोनों छात्र अपने साथियों के साथ रथ के पास गए थे। रथ को धक्का लगाने के दौरान अचानक करंट फैल गया और यह दर्दनाक हादसा हो गया। सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. रघुनंदन भगत ने बताया कि दोनों युवकों को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। प्रथम दृष्टया मामला करंट लगने का प्रतीत होता है। हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस जांच और सुरक्षा उपायों की मांग
पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। वहीं स्थानीय लोगों ने धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और हाईटेंशन बिजली लाइनों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए प्रशासन को आयोजन स्थलों के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइनों को अस्थायी रूप से बंद करने या ऊंचा करने जैसे कदम उठाने चाहिए। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा जैसी परंपराओं में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।
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यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक आयोजनों में बिजली सुरक्षा उपायों की उपेक्षा को उजागर करती है। झारखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बिजली सुरक्षा के लिए आवश्यक दिशानिर्देश
सार्वजनिक आयोजनों और धार्मिक यात्राओं के दौरान बिजली सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और आयोजकों की संयुक्त जिम्मेदारी है। हाईटेंशन बिजली लाइनों के निकट किसी भी प्रकार की गतिविधि संचालित करने से पूर्व विद्युत विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, रथ यात्रा जैसे आयोजनों के मार्ग का पूर्व निरीक्षण किया जाना चाहिए और मार्ग में आने वाली सभी बिजली लाइनों को या तो अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाए या फिर उनकी ऊंचाई बढ़ाकर सुरक्षित दूरी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, आयोजन स्थल पर अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक चिकित्सा किट की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे धार्मिक आयोजनों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करें जिसमें बिजली सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन निकासी योजना शामिल हो। इस दिशा में बिजली सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बिजली के तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और करंट लगने की स्थिति में प्राथमिक उपचार के बारे में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में विद्युत सुरक्षा पर नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए।
झारखंड सरकार को इस घटना से सबक लेते हुए पूरे राज्य में धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए बिजली सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य कर देना चाहिए। तभी भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकेगा।
पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग
घटना के बाद स्थानीय विधायक और सामाजिक संगठनों ने मृतक छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा के स्थानीय नेताओं ने प्रशासन से जल्द से जल्द मुआवजे की घोषणा करने का आग्रह किया है।
उपायुक्त ने आश्वासन दिया है कि मुख्यमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही घायल छात्रों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।

