21 पंचायतों वाले प्रखंड में एक साल से बीडीओ नहीं, विकास कार्यों पर उठे सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता मृत्युंजय बर्मन
राज्य सरकार ने हाल ही में यह नीति स्पष्ट की है कि 12 से अधिक पंचायतों वाले प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचल अधिकारी (सीओ) की अलग-अलग पदस्थापना की जाएगी। लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले का औद्योगिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण गम्हरिया प्रखंड इस नीति के बावजूद पिछले लगभग एक वर्ष से नियमित बीडीओ के बिना संचालित हो रहा है।
भाजपा नेत्री रश्मि भेंगरा ने इसे सरकार की घोषित नीति और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा विरोधाभास बताया है। उनका कहना है कि गम्हरिया के अंतिम नियमित बीडीओ का स्थानांतरण 16 अगस्त 2025 को हो गया था। इसके बाद से आज तक किसी अधिकारी की नियमित पदस्थापना नहीं की गई और अंचल अधिकारी ही अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।
रश्मि ने बताया कि गम्हरिया प्रखंड में 21 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 8 पंचायतें प्रशासनिक रूप से गम्हरिया प्रखंड में हैं, जबकि उनका राजस्व क्षेत्र सरायकेला अंचल के अधीन आता है। इसके अलावा आदित्यपुर नगर निगम के 35 वार्डों से जुड़े विकास एवं समन्वय कार्यों की जिम्मेदारी भी इसी प्रखंड प्रशासन पर है। दो लाख से अधिक आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के कारण यह जिला का सबसे अधिक कार्यभार वाला प्रखंड माना जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नियमित बीडीओ के अभाव में पंचायतों की विकास योजनाओं की स्वीकृति, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामसभा से जुड़े कार्य तथा अन्य विकास कार्यक्रमों की निगरानी प्रभावित हो रही है। वहीं अंचल अधिकारी पहले से ही भूमि, दाखिल-खारिज, अतिक्रमण और राजस्व संबंधी मामलों में व्यस्त रहते हैं।
रश्मि भेंगरा ने उपायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार से गम्हरिया में तत्काल नियमित बीडीओ की नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक पद भरने का मामला नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र और दो लाख से अधिक आबादी के विकास से जुड़ा विषय है।

