लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के बारीडीह निवासी स्क्रैप कारोबारी अजय शर्मा को डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) की टीम ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। उन पर फर्जी बिलों के माध्यम से जीएसटी की कथित चोरी करने का आरोप है।
स्क्रैप कारोबारी अजय शर्मा पर डीजीजीआई की कार्रवाई का ब्यौरा
डीजीजीआई की जांच में अजय शर्मा का नाम स्क्रैप कारोबार से जुड़े एक कथित टैक्स चोरी नेटवर्क में सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, इस मामले में पहले से गिरफ्तार स्क्रैप कारोबारी विक्की भालोटिया, शिव देवरा और अमित गुप्ता से जुड़े जांच के दौरान उनकी कथित संलिप्तता के संकेत मिले। इसके बाद डीजीजीआई ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की और पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद डीजीजीआई की टीम अजय शर्मा को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंची। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
उल्लेखनीय है कि इसी कथित टैक्स चोरी मामले में विक्की भालोटिया, शिव देवरा और अमित गुप्ता करीब एक वर्ष से रांची जेल में बंद हैं। डीजीजीआई अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
फर्जी बिलिंग के जरिए जीएसटी चोरी का मॉडस ऑपरेंडी
जीएसटी इंटेलिजेंस के सूत्रों के मुताबिक, स्क्रैप कारोबार में फर्जी बिलिंग का यह रैकेट लंबे समय से चल रहा था। कारोबारी फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए नकली खरीद बिल बनाते थे। इस प्रक्रिया में वे शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा करते थे जो केवल कागजों पर मौजूद होती थीं। डीजीजीआई की जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की गई है। एजेंसी अब मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से भी जांच कर रही है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी सूचित किया जा सकता है।
डीजीजीआई की भूमिका और पिछली कार्रवाइयां
डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के तहत काम करने वाली एक प्रमुख खुफिया एजेंसी है। इसका मुख्य कार्य जीएसटी चोरी, कर धोखाधड़ी और राजस्व हानि से जुड़े मामलों की जांच करना है। पिछले कुछ वर्षों में डीजीजीआई ने देशभर में कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं, जिनमें हजारों करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। झारखंड में भी डीजीजीआई की टीम लगातार सक्रिय है और स्क्रैप, लोहा, कोयला जैसे क्षेत्रों में फर्जी बिलिंग के मामलों का भंडाफोड़ कर रही है। जीएसटी पोर्टल पर भी करदाताओं को अनुपालन के लिए जागरूक किया जाता है।
आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह
गिरफ्तारी के बाद अजय शर्मा को सीआरपीसी की धाराओं के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। डीजीजीआई उनकी रिमांड मांगेगी ताकि उनसे विस्तृत पूछताछ की जा सके और नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। पहले से जेल में बंद विक्की भालोटिया, शिव देवरा और अमित गुप्ता के बयानों को भी इस केस में अहम सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो उन्हें जीएसटी अधिनियम के तहत कड़ी सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
कारोबारियों के लिए सबक और अनुपालन की जरूरत
यह मामला स्क्रैप और धातु क्षेत्र के कारोबारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जीएसटी व्यवस्था में ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल प्रणाली लागू होने के बाद फर्जी बिलिंग करना बेहद मुश्किल हो गया है। विभाग डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके संदिग्ध लेनदेन की पहचान करता है। कारोबारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सप्लाई चेन की पूरी जांच करें, केवल वास्तविक डीलर्स से माल खरीदें और जीएसटी रिटर्न समय पर दाखिल करें। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना का लाभ उठाया जा सकता है।

