लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
इंद्र यादव/मुंबई/पालघर,नालासोपारा पश्चिम के पॉश इलाके में चलने वाले ‘रीगल स्पा‘ पर पुलिस का छापा क्या पड़ा, रसूख और अय्याशी के पर्दे एक-एक कर गिरने लगे। बाहर से चमक-धमक वाला यह स्पा अंदर से किसी ‘देह व्यापार की मंडी’ से कम नहीं निकला। पुलिस की रेड में 6 पीड़ित महिलाएं तो मिल गईं, लेकिन स्पा की आड़ में चल रहा घिनौना खेल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय है।
‘उम्रदराज’ कमलेश पाठक और रीगल स्पा की काली करतूत!
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कमलेश पाठक (52) की हो रही है। जवानी ढलने की उम्र में जब इंसान समाज में आदर्श और मार्गदर्शन की भूमिका में होता है, तब कमलेश पाठक स्पा के नाम पर ‘अंधेरे कारोबार’ का मैनेजर बना बैठा था। 52 साल की उम्र में कानून को ठेंगा दिखाने का जज्बा रखने वाले कमलेश को पुलिस ने धर दबोचा है। अब वही पुलिस की कस्टडी में बैठकर अपने किए का हिसाब दे रहे हैं।
उनके साथ 22 साल का महेश चव्हाण भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। स्पा का असली ‘मालिक’ भीमसिंग नायक फिलहाल पुलिस की रडार पर है और आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस की कार्रवाई और सवालिया निशान
पुलिस ने मौके से 6 महिलाओं को मुक्त तो करा लिया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर रिहायशी इलाकों में ‘स्पा’ की आड़ में कब तक यह गोरखधंधा चलता रहेगा! नालासोपारा पुलिस ने भले ही इस रैकेट का पर्दाफाश कर खुद की पीठ थपथपाई हो, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या प्रशासन को इतने दिनों तक इसकी भनक नहीं लगी!
फिलहाल, कमलेश पाठक और उनका ‘स्पा गैंग’ अब सलाखों के पीछे है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस ‘गंदे खेल’ में शामिल अन्य चेहरों को भी जल्द बेनकाब किया जाएगा।
नालासोपारा में अवैध स्पा सेंटरों का बढ़ता जाल
मुंबई से सटे पालघर जिले के नालासोपारा, वसई और विरार जैसे क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से अवैध स्पा सेंटरों की बाढ़ सी आ गई है। स्थानीय समाजसेवियों का मानना है कि इन क्षेत्रों में कई ऐसे स्पा सेंटर चल रहे हैं, जिनके पास न तो वैध लाइसेंस हैं और न ही वे नियमों का पालन कर रहे हैं। रीगल स्पा पर हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे को उजागर कर दिया है। पॉश सोसायटियों और व्यावसायिक परिसरों में चल रहे इन सेंटरों में थेरेपी के नाम पर जिस्मफरोशी का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।
पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर की जाने वाली कार्रवाई के बावजूद, इन अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से नकेल कसना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अक्सर देखा जाता है कि एक जगह छापा पड़ने के बाद ये रैकेट संचालक किसी दूसरे नाम से नए इलाके में अपना काला धंधा शुरू कर देते हैं। इस वजह से स्थानीय पुलिस के खुफिया तंत्र पर भी सवाल उठते रहे हैं कि आखिर बिना स्थानीय संरक्षण के ये धंधे महीनों तक कैसे चलते रहते हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी कार्रवाई
इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नए कानूनों यानी BNS (भारतीय न्याय संहिता) और पीटा कानून (PITA) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, मानव तस्करी और स्पा की आड़ में जबरन देह व्यापार करवाने के मामलों में कठोर सजा के प्रावधान हैं। पुलिस अब स्पा मालिक भीमसिंग नायक की तलाश में जुटी है, जिसकी गिरफ्तारी के बाद इस रैकेट के वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क का बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।
इस तरह के मामलों में शामिल मुख्य आरोपियों को कड़ी सजा मिलने से समाज में एक कड़ा संदेश जाता है। पुलिस ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास किसी भी स्पा या मसाज पार्लर में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें, तो वे तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन को सूचित करें। पुलिस ऐसे मामलों में सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखती है। आप अधिक जानकारी के लिए पालघर पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी संपर्क कर सकते हैं।
स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और सामाजिक प्रभाव
नालासोपारा के इस पॉश इलाके में रहने वाले स्थानीय निवासियों में इस घटना के बाद से काफी रोष है। लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में इस प्रकार के अनैतिक कार्यों से बच्चों और युवाओं पर बेहद बुरा असर पड़ता है। परिवार के लोगों का इन रास्तों से गुजरना भी दूभर हो जाता है। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि नगर निगम और पुलिस प्रशासन को मिलकर सभी सक्रिय स्पा सेंटरों के लाइसेंस की सघन जांच करनी चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को तुरंत सील किया जाना चाहिए।
यह भी देखा गया है कि इन रैकेटों में फंसाई गई अधिकांश महिलाएं गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आती हैं, जिन्हें नौकरी या अच्छे वेतन का लालच देकर इस दलदल में धकेल दिया जाता है। पुलिस द्वारा छुड़ाई गई 6 पीड़ित महिलाओं को फिलहाल सुधार गृह भेजा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जाएगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस पूरे मामले ने समाज के उस स्याह चेहरे को सामने लाया है, जहां रसूख और पैसे की हवस में इंसानी जिंदगियों का सौदा किया जाता है।

