झारखंड साहित्य सभा के तत्वावधान में त्र्यंबक महादेव मंदिर परिसर में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
राष्ट्र संवाद संवादाता
कार्यक्रम में शहर के 22 कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं से रूबरू कराया। मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद एवं कांग्रेस के प्रदेश सचिव प्रिंस सिंह उपस्थित रहे। अध्यक्ष मंडल में सुरेश दत्त प्रणय, अशोक सुखदर्शी, ज्योत्सना अस्थाना तथा मंदिर प्रतिनिधि उमेश चंद्र सिंह शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद सविता सिंह मीरा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी एवं सुमधुर संचालन झारखंड साहित्य सभा की अध्यक्ष डॉ. लता मानकर ने किया।
कवि सम्मेलन में साबिर नवाज ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचना “शहीदों की तरह मैं भी अलग पहचान रखता हूं, जबां पे धरती में सीने में हिंदुस्तान रखता हूं” सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। रमेश हंसमुख, सुदीप्ता जेठी रावत, सरिता सिंह, शोभा किरण, संजय पाठक ‘स्नेही’, काशीनाथ प्रजापति और डॉ. लता मानकर ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कविताओं में समाज, राष्ट्र, रिश्तों और वर्तमान परिस्थितियों की गहरी झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम में सुनीता सोनी, वीणा कुमारी, शैलेंद्र अस्थाना, सविता सिंह, अजय मेहताब, डॉ. प्रियंका, अजय मुस्कान, जयप्रकाश पांडेय, हरिहर जी, उदय प्रताप, हयात सहित अन्य कवियों ने भी काव्य पाठ किया। देर तक चले इस कवि सम्मेलन में साहित्य प्रेमियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही और सभी ने कवियों की रचनाओं की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

