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    पूर्वांचल की बंद पड़ी गणेश शुगर मिल को पुनर्जीवित करने की मांग तेज

    Sumi BangabashBy Sumi BangabashJune 27, 2026No Comments4 Mins Read
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    पूर्वांचल की बंद पड़ी गणेश शुगर मिल को पुनर्जीवित करने की मांग तेज

     राष्ट्र संवाद संवादाता 

    किसानों ने योगी सरकार से की हस्तक्षेप की अपील

    फरेंदा (महराजगंज)। पूर्वांचल की लगभग नौ दशक पुरानी ऐतिहासिक गणेश शुगर मिल, फरेंदा को पुनः संचालित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय किसानों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पिछले लगभग 30 वर्षों से बंद पड़ी यह मिल न केवल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि हजारों किसानों की आजीविका पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। उनका मानना है कि यदि इस मिल को दोबारा चालू किया जाए तो पूर्वांचल में कृषि, उद्योग, रोजगार और व्यापार के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा।

    फरेंदा जिला बनाओ मंच के संयोजक डॉ. आर.एन. सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष पहल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गणेश शुगर मिल के मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए न तो नई भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता है और न ही नई इकाई स्थापित करनी होगी। मौजूदा परिसर और आधारभूत संरचना उपलब्ध है। आवश्यकता केवल आधुनिक मशीनरी, नए कल-पुर्जों और तकनीकी उन्नयन की है।

    डॉ. सिंह का कहना है कि मिल के पास लगभग 781 एकड़ भूमि है, जो इसे आर्थिक दृष्टि से भी एक मजबूत औद्योगिक इकाई बनाती है। उनका मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक के साथ इस मिल का संचालन शुरू किया जाए तो चीनी उत्पादन के साथ-साथ इथेनॉल निर्माण की भी व्यापक संभावनाएं विकसित होंगी। इससे राज्य की इथेनॉल नीति को भी बल मिलेगा और किसानों को गन्ने का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

    उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में प्रदेश की कई वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने का उल्लेखनीय कार्य किया है। पिपराइच और मुंडेरवा जैसी चीनी मिलों का पुनः संचालन इसका प्रमुख उदाहरण है। इसी प्रकार वर्षों तक बंद रहने के बाद गोरखपुर उर्वरक कारखाना भी फिर से शुरू हुआ और आज क्षेत्र के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे में गणेश शुगर मिल को पुनर्जीवित करना भी सरकार के लिए असंभव कार्य नहीं है।

    स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि यह मिल चालू होती है तो फरेंदा और नौतनवा तहसील के हजारों गन्ना उत्पादक किसानों को अपनी उपज के लिए स्थानीय बाजार मिलेगा। वर्तमान में किसानों को दूर-दराज की चीनी मिलों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है और समय पर भुगतान की समस्या भी बनी रहती है। मिल के संचालन से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय व्यापार को भी गति मिलेगी।

    इस बीच पड़ोसी राज्य बिहार की पहल ने भी इस मुद्दे को नई चर्चा में ला दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिहार सरकार ने राज्य की बंद पड़ी 9 चीनी मिलों को पुनः शुरू करने और 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इसके तहत निवेशकों को मात्र एक रुपये की टोकन राशि पर 40 एकड़ तक भूमि उपलब्ध कराने जैसी प्रोत्साहन योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इस पहल के बाद उत्तर प्रदेश में भी बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की मांग और तेज हो गई है।

    डॉ. आर.एन. सिंह ने कहा कि जब पड़ोसी राज्य चीनी उद्योग के विस्तार के लिए बड़े कदम उठा रहे हैं, तब गन्ना उत्पादन में अग्रणी उत्तर प्रदेश को भी अपनी ऐतिहासिक औद्योगिक इकाइयों के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि गणेश शुगर मिल के समक्ष मौजूद प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय बाधाओं का शीघ्र समाधान कर इसे पुनः संचालित किया जाए।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेती है तो फरेंदा-नौतनवा क्षेत्र के किसान, व्यापारी और आम नागरिक स्वयं को लाभान्वित महसूस करेंगे और पूर्वांचल के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। गणेश शुगर मिल का पुनर्जीवन केवल एक उद्योग को चालू करना नहीं होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, कृषि और रोजगार को नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है।

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