टाटा-रांची एलिवेटेड कॉरिडोर को फिर झटका, वन भूमि डायवर्जन के लिए NOC पर सरकार ने लगाई रोक!
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित पारडीह कालीमंदिर से बालीगुमा तक बनने वाले 4/6 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। परियोजना के लिए उपयोगिता (यूटिलिटी) शिफ्टिंग हेतु आवश्यक 4.644 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन पर झारखंड सरकार ने फिलहाल अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने से इनकार कर दिया है।
सरकार ने इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden-CWLW) से विस्तृत टिप्पणी मांगी है। इसके बाद ही वन भूमि डायवर्जन और एनओसी पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इससे परियोजना की स्वीकृति प्रक्रिया में एक बार फिर देरी की संभावना बढ़ गई है।
करीब 10.02 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर पारडीह कालीमंदिर, डिमना चौक होते हुए बालीगुमा तक बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य जमशेदपुर के सबसे व्यस्त मार्ग पर ट्रैफिक जाम से राहत देना और रांची-जमशेदपुर के बीच आवागमन को सुगम बनाना है। परियोजना का निर्माण कार्य ईपीसी मोड में एच.जी. इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
हालांकि, परियोजना का निर्माण कार्य पहले से ही विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं से प्रभावित रहा है। वन भूमि हस्तांतरण, बिजली लाइनों की शिफ्टिंग, जलापूर्ति पाइपलाइन हटाने तथा अन्य विभागीय मंजूरियों में देरी के कारण कार्य की गति प्रभावित हुई है। हाल के महीनों में निर्माण स्थल पर धूल प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध भी सामने आया था।
अब सभी की नजर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की रिपोर्ट पर टिकी है। उनकी टिप्पणी मिलने के बाद ही राज्य सरकार वन भूमि डायवर्जन और एनओसी पर अंतिम निर्णय लेगी। यदि मंजूरी में और विलंब होता है तो परियोजना की समयसीमा आगे बढ़ सकती है।

