राष्ट्र संवाद संवाददाता सुनील शर्मा
यूसिल तुरामडीह क्षेत्र में स्थानीय रोजगार एवं मजदूर बहाली के मुद्दे को लेकर सोमवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया। नंदूप विस्थापित समिति द्वारा गेट जाम और धरना-प्रदर्शन आयोजित कर ग्राम सभा एवं यूसिल प्रबंधन के बीच 28 मई को जादूगोड़ा तथा 8 जून को हुई त्रिपक्षीय वार्ता और समझौते को रद्द करने की मांग उठाई गई। इस दौरान कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, मीरा मुंडा समेत भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।
वहीं दूसरी ओर संयुक्त ग्राम सभा, माझी बाबा एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर उक्त मांगों का विरोध किया। संयुक्त ग्राम सभा का कहना है कि त्रिपक्षीय वार्ता में सभी ग्राम सभाओं से सत्यापन के बाद आगे की प्रक्रिया तय करने पर सहमति बनी थी, लेकिन कुछ लोग इस निर्णय को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने मजदूर बहाली में किसी भी प्रकार की दलाली और बिचौलियागिरी का विरोध करते हुए विशाल रैली निकाली तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का पुतला दहन किया।
प्रदर्शन के दौरान “मजदूर एकता जिंदाबाद”, “यूसिल के दलाल होश में आओ”, “यूसिल की दलाली बंद करो”, “अर्जुन मुंडा गो बैक”, “यूसिल प्रबंधन होश में आओ” और “ग्राम सभा जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। पंचायत मुखिया एवं माझी बाबा कान्हू मुर्मू ने कहा कि किसी भी कीमत पर मजदूर बहाली में दलाली नहीं होने दी जाएगी और विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। कार्यक्रम में माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, राजेंद्र नायक, सेनबसु हांसदा, भोगता हांसदा, जितेन हेंब्रम, भागमत मार्डी, बिक्रम टुडू, सोमाई पड़ेया, गंगा नायक, कारु टुडू, झानो दिग्गी, रुक्मिणी हो समेत करीब दो हजार से अधिक ग्रामीण, युवा और महिलाएं मौजूद रहे।

