लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल निष्पक्ष चुनावों की नींव रखता है, बल्कि हर नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का समान अवसर भी प्रदान करता है। इसी उद्देश्य के साथ, निर्वाचन आयोग नियमित रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम आयोजित करता है। हाल ही में, झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने आगामी SIR 2026 के संबंध में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसका लक्ष्य मतदाताओं के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करना है।
मतदान लोकतंत्र की आत्मा है, और मतदाता सूची ही वह आधारशिला है जिस पर यह पूरी प्रक्रिया टिकी होती है। एक त्रुटिरहित सूची यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी पात्र नागरिक वंचित न रहे और कोई भी अपात्र व्यक्ति अनुचित लाभ न उठा सके। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं।
रांची, 21 जून। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 के दौरान किसी भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मंचों पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने संबंधी भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, जबकि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करना है।
SIR 2026: क्यों पात्र मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा नाम?
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया है कि SIR 2026 का संपूर्ण उद्देश्य मतदाता सूची को और अधिक त्रुटिरहित बनाना है, न कि किसी पात्र नागरिक को उनके मताधिकार से वंचित करना। यह स्पष्टीकरण उन भ्रामक सूचनाओं के जवाब में आया है जो यह दावा कर रही हैं कि इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे। आयोग का कार्य प्रणाली में सुधार लाकर हर योग्य नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करना है। यह अभियान भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने बताया कि 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलने वाले इन्यूमरेशन चरण में सभी मौजूदा मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। जो मतदाता हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म जमा करेंगे, उनका नाम बिना किसी दस्तावेज की मांग के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
यह इन्यूमरेशन चरण, जो लगभग एक महीने तक चलेगा, मतदाता सूची को अद्यतन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि वर्तमान में सूची में शामिल सभी मतदाता अभी भी अपने निवास स्थान पर हैं और सक्रिय रूप से मतदान कर सकते हैं। फॉर्म जमा करने की यह प्रक्रिया बेहद सरल और सुगम बनाई गई है ताकि अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। मतदाताओं को केवल अपना हस्ताक्षरित फॉर्म जमा करना होगा, जिससे अनावश्यक कागजी कार्रवाई से बचा जा सके। यह सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जिनके पास पहचान या निवास के अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन वे एक वैध मतदाता हैं। इस चरण का मुख्य उद्देश्य सूची में शामिल हर व्यक्ति की पुष्टि करना और उसे वैध बनाना है।
सीईओ ने कहा कि 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में केवल पांच श्रेणियों के अन-कलेक्टेबल इन्यूमरेशन फॉर्म शामिल नहीं किए जाएंगे। इनमें डुप्लिकेट/एकाधिक प्रविष्टि वाले मतदाता, मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, अनुपस्थित/अप्राप्य मतदाता तथा विदेशी नागरिक अथवा फॉर्म पर हस्ताक्षर से इनकार करने वाले व्यक्ति शामिल हैं। इन सभी मामलों को ASDD (Absent, Shifted, Duplicate, Death) सूची में प्रकाशित किया जाएगा।
ASDD सूची का उद्देश्य मतदाता सूची से अवांछित या अमान्य प्रविष्टियों को हटाना है ताकि इसकी शुद्धता सुनिश्चित हो सके।
- डुप्लिकेट/एकाधिक प्रविष्टि वाले मतदाता: यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति का नाम एक से अधिक बार सूची में न हो, जिससे मतदान में धांधली की संभावना कम हो।
- मृत मतदाता: मृत व्यक्तियों के नाम हटाना एक संवेदनशील लेकिन आवश्यक प्रक्रिया है, जिससे ‘घोस्ट वोटिंग’ जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
- स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता: जो मतदाता अपना निवास स्थान स्थायी रूप से बदल चुके हैं, उनके नाम उनके पुराने निर्वाचन क्षेत्र से हटा दिए जाते हैं और उन्हें नए स्थान पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
- अनुपस्थित/अप्राप्य मतदाता: ऐसे मतदाता जो अपने दर्ज पते पर नहीं मिलते या अनुपस्थित पाए जाते हैं, उनकी जांच की जाती है।
- विदेशी नागरिक अथवा फॉर्म पर हस्ताक्षर से इनकार करने वाले व्यक्ति: भारतीय संविधान के तहत केवल भारतीय नागरिक ही मतदान के पात्र हैं। इसी तरह, जो लोग फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हैं, उनकी पात्रता पर प्रश्नचिन्ह लगता है।
इन श्रेणियों के तहत आने वाले मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से हटाए जाते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह है।
उन्होंने कहा कि SIR एक पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें राजनीतिक दलों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ASDD सूची मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों, नगर निकाय कार्यालयों तथा निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी।
लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि SIR 2026 प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह उनके लिए एक अवसर है कि वे प्रक्रिया की निगरानी करें और किसी भी विसंगति को सामने लाएं। यह सुनिश्चित करता है कि निर्णय केवल एकतरफा न हों बल्कि सभी हितधारकों की सहमति से लिए जाएं।
दावे एवं आपत्तियों की अवधि, जो 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक चलेगी, नागरिकों और राजनीतिक दलों दोनों को अपनी चिंताएं व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलती से ASDD सूची में शामिल हो गया है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में बना हुआ है, तो इस अवधि के दौरान आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र है जो मतदाता सूची की अंतिम शुद्धता सुनिश्चित करता है। निर्वाचन विभाग जनता की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर अधिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जा सकते हैं। [INTERNAL_LINK_HOLDER]
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मतदाताओं से अपील की कि वे निर्धारित अवधि में अपना हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म अवश्य जमा करें और किसी भी भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें।
संक्षेप में, SIR 2026 का लक्ष्य एक मजबूत, सटीक और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करना है जो झारखंड में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों की गारंटी दे सके। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार का संदेश स्पष्ट है: किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। नागरिकों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय, सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए और अपने अधिकारों का प्रयोग सुनिश्चित करना चाहिए। यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना योगदान दे।
मतदाताओं को यह याद रखना चाहिए कि उनकी भागीदारी ही इस प्रक्रिया को सफल बनाती है। अपने इन्यूमरेशन फॉर्म को समय पर जमा करके और यदि आवश्यक हो तो दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराकर, वे यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनका मताधिकार सुरक्षित रहे। यह अभियान न केवल निर्वाचन आयोग का प्रयास है, बल्कि यह हर मतदाता का सामूहिक प्रयास भी है ताकि भारतीय लोकतंत्र की नींव और भी मजबूत हो सके।

