झामुमो नेता बाघ राय मार्डी के नेतृत्व में प्रदर्शन, बोले- 80 आदिवासी परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित
राष्ट्र संवाद संवाददाता
*जादूगोड़ा फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के सोमायडीह गांव अंतर्गत काशीडीह टोला में विकास की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। झामुमो नेता बाघ राय मार्डी की अगुवाई में ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन कर काशीडीह को सोमायडीह से अलग कर स्वतंत्र राजस्व गांव घोषित करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड बने 25 साल हो गए, लेकिन काशीडीह आज भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है।
12 टोलों के बीच दब गया काशीडीह का विकास
बाघ राय मार्डी ने बताया कि जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के सोमायडीह गांव के अधीन खुडराकोचा, नाग काटी, कुंदी बेड़ा, चिडुडीह, भट्टा गोडा, जाहेर टोला, बोमरो कोचा, कुंजा गोंडा समेत कुल 12 टोले आते हैं। इतने टोले एक पंचायत में होने से काशीडीह टोले की पूरी तरह अनदेखी हो रही है। योजनाएं दूसरे टोलों तक पहुंच जाती हैं, पर काशीडीह तक नहीं पहुंच पातीं।
ग्रामीणों का दर्द: न पानी, न स्कूल, न आवास
काशीडीह के टोला प्रधान भीलू राम बेसरा समेत मिर्जा सोरेन, विजय बोदरा, राम दास हेंब्रम, सुरेंद्र नाथ मुर्मू ने बताया कि गांव में समस्याओं का अंबार है:
– *पानी का संकट*: गांव में एक भी जल मीनार नहीं है। सोमायडीह के ज्यादातर चापाकल खराब पड़े हैं। पीने के पानी के लिए दूर जाना पड़ता है।
– *राशन के लिए 2 किमी पैदल*: पीडीएस राशन लेने के लिए 2 किमी दूर सूरदा क्रॉसिंग जाना पड़ता है। बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी होती है।
– *शिक्षा से दूरी*: टोले में एक भी स्कूल नहीं है। बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है।
– *आवास योजना से वंचित*: 80 आदिवासी परिवार यहां रहते हैं, पर एक भी परिवार को अबुआ आवास योजना का लाभ नहीं मिला।
– *न नेटवर्क, न CSR का लाभ*: गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं आता। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का CSR फंड भी काशीडीह तक नहीं पहुंचता।
क्या बोले ग्रामीण
टोला प्रधान भीलू राम बेसरा ने कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी हम बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सोमायडीह पंचायत बहुत बड़ी है, इसलिए काशीडीह को अलग राजस्व गांव का दर्जा मिले तो सीधे योजनाएं आएंगी।
ग्रामीण मिर्जा सोरेन का कहना था कि बारिश में रास्ते बंद हो जाते हैं। बीमार को खाट पर लादकर 2 किमी ले जाना पड़ता है।
प्रशासन से उम्मीद
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन और तेज होगा। अब देखना यह है कि प्रशासन 80 आदिवासी परिवारों वाले इस टोले को कब तक उसका हक देता है।

