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    Home » झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका: ‘धोखे’ का आरोप
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    झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका: ‘धोखे’ का आरोप

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaJune 18, 2026No Comments4 Mins Read
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    राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका लगा है। इस चुनाव परिणाम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब महागठबंधन के पास पर्याप्त आंकड़े होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा चुनाव हार गए। चुनाव में झामुमो प्रत्याशी बैद्यनाथ राम और निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी विजयी हुए हैं। यह घटना न केवल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह महागठबंधन के भीतर की एकजुटता पर भी सवाल खड़े करती है। इस अप्रत्याशित हार ने आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी कई संकेत दिए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि अंतर्कलह किस कदर राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

    झारखंड विधानसभा की वर्तमान संरचना को देखते हुए, दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हमेशा ही दिलचस्प रहा है। प्रत्येक प्रत्याशी को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में वोटों की आवश्यकता होती है, जो विधायकों की कुल संख्या पर निर्भर करता है। इस बार, महागठबंधन का गणित कागजों पर मजबूत दिख रहा था, लेकिन वास्तविक परिणाम ने सबको चौंका दिया। राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को गठबंधन की कमजोर कड़ी के रूप में देख रहे हैं, जहां पार्टी आलाकमान का नियंत्रण कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में, यह केवल एक सीट की हार नहीं, बल्कि गठबंधन की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

    झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका और आरोपों का दौर

    चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के राजू ने सीधे तौर पर राजद और माले पर निशाना साधा। उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि झामुमो के सभी विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी राजद और माले के विधायकों ने उनके पक्ष में वोट नहीं किया, जिसकी वजह से कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। यह बयान अपने आप में गंभीर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर गठबंधन धर्म के उल्लंघन का संकेत देता है। यदि गठबंधन के भीतर ही इस तरह की क्रॉस-वोटिंग होती है, तो यह भविष्य में साझा रणनीति बनाने और चुनावों का सामना करने में बड़ी बाधा बन सकती है।

    मतगणना के अनुसार, विजयी प्रत्याशी झामुमो प्रत्याशी बैद्यनाथ राम को सर्वाधिक 30 वोट मिले, जबकि निर्दलीय परिमल नाथवानी को 28 वोट हासिल हुए। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को सिर्फ 20 वोट ही मिल पाए, जो अपेक्षित संख्या से काफी कम था। इसके अलावा, तीन विधायकों के वोट अवैध घोषित किए गए, जिसने परिणाम को और भी जटिल बना दिया। इन अवैध वोटों का संबंध किस पार्टी से था, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन इससे कांग्रेस की उम्मीदों को और भी धक्का लगा। यह आंकड़ों का खेल था, जिसमें कांग्रेस पिछड़ गई, जबकि उनके पास संख्या बल का समर्थन होने का दावा था।

    महागठबंधन में दरार और कांग्रेस की नाराजगी

    परिणाम सामने आते ही मतगणना स्थल पर भाजपा विधायकों के नारों के बीच कांग्रेस खेमे में उदासी छा गई। कांग्रेस नेता मतगणना स्थल से बाहर निकल गए, जो उनकी निराशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। हार स्वीकार करते हुए प्रणव झा ने कहा कि चुनाव में हार-जीत लगी रहती है। उन्होंने उन सभी विधायकों का आभार जताया जिन्होंने उन्हें वोट दिया और उम्मीद जताई कि दोनों विजयी प्रत्याशी झारखंड के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। हालांकि, उनके बयान में निराशा साफ झलक रही थी, क्योंकि यह हार न केवल व्यक्तिगत थी, बल्कि पार्टी के लिए भी एक बड़ा झटका थी।

    महागठबंधन के भीतर वोटों की इस टूट से कांग्रेस के खेमे में नाराजगी साफ देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह केवल एक राज्यसभा चुनाव का परिणाम है या फिर यह झारखंड में महागठबंधन के भविष्य की ओर इशारा कर रहा है। कांग्रेस के कई नेता अंदरूनी तौर पर राजद और माले के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं और केंद्रीय नेतृत्व से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। यह घटना निश्चित रूप से गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच विश्वास में कमी लाएगी और आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को फिर से परिभाषित कर सकती है।

    यह प्रकरण दर्शाता है कि चुनावी राजनीति में केवल संख्या बल ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि आंतरिक समन्वय, विश्वास और अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के लिए यह एक कड़ा सबक है कि वे अपने सहयोगियों के साथ संबंधों को और मजबूत करें और किसी भी प्रकार की क्रॉस-वोटिंग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। झारखंड की राजनीति में यह हार लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी और इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

    भारत में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया और इसके महत्व को समझने के लिए आप भारतीय संसद की राज्यसभा के बारे में और जान सकते हैं।

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