डी बी एम एस कॉलेज ऑफ एजुकेशन की छात्रा मेघा कुमारी ने हिमाचल में पूर्वी सिंहभूम का प्रतिनिधित्व किया
राष्ट्र संवाद संवादाता
विकसित एवं वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में झारखंड का प्रतिनिधित्व
हिमाचल प्रदेश के रिकांगपिओ (Reckong Peo) में मेरा युवा भारत (MY Bharat), गृह मंत्रालय तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “विकसित एवं वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम” में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित युवाओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, तमिलनाडु, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों का चयन किया गया था।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना तथा उनके समग्र विकास के लिए बेहतर आधारभूत संरचना, संपर्क व्यवस्था, पर्यटन और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने की संभावनाओं का अध्ययन करना था। प्रतिभागियों को सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक जीवन को निकट से जानने का अवसर प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के अधिकारियों एवं जवानों के साथ समय बिताया तथा उनके अनुशासित जीवन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण को करीब से देखा। इससे युवाओं को देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगे सुरक्षा बलों के कार्यों एवं चुनौतियों की गहन समझ प्राप्त हुई।
इस अवसर पर प्रतिभागियों को रक्छम (Rakchham) गांव में ग्रामीण परिवारों के साथ रहने का अवसर मिला, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी जीवनशैली, संस्कृति एवं परंपराओं को जाना। साथ ही प्रतिभागियों ने बतसेरी (Batseri) और चितकुल (Chitkul) गांवों की ग्राम सभाओं में भाग लेकर ग्रामीण स्वशासन एवं सामुदायिक विकास की प्रक्रियाओं को समझा। चितकुल को भारत के अंतिम गांव के रूप में जाना जाता है।
इस कार्यक्रम ने युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय एकता और समावेशी विकास के महत्व को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने इस अनुभव को अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक बताया तथा सीमावर्ती गांवों के सतत विकास में युवाओं की सक्रिय भूमिका की आवश्यकता पर बल दिया।

