आदिवासी ही हैं जनजातीय समुदाय, ‘वनवासी’ नहीं : राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्र संवाद संवादाता
बैतूल, 18 जून। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्यप्रदेश के बैतूल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जनजातीय समुदाय को भले ही कुछ लोग ‘वनवासी’ कहें, लेकिन वे वास्तव में आदिवासी हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सृष्टि के आरंभ से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीता आया है और उसकी जीवनशैली आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी हुई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति, पंचतत्व, सूर्य, चंद्रमा, जल, वायु और धरती की पूजा करता है तथा शांति, प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन जीता है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि आज तनाव और युद्ध से जूझ रही दुनिया में इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
मुर्मू ने कहा कि किसी भी समाज का सशक्तीकरण केवल आर्थिक विकास से नहीं होता, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना से होता है। उन्होंने विकास और पारंपरिक मूल्यों के संतुलन को समृद्ध समाज की आधारशिला बताया।
राष्ट्रपति ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यात्म, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना होगा। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल और केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके भी उपस्थित थे।

