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    Home » दलमा में अवस्थित संरचनाओं और मांडू में हिमनदों से निर्मित भू-संरचनाओं को जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित किया जाएः सरयू राय
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    दलमा में अवस्थित संरचनाओं और मांडू में हिमनदों से निर्मित भू-संरचनाओं को जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित किया जाएः सरयू राय

    News DeskBy News DeskJune 5, 2026No Comments5 Mins Read
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    दलमा में अवस्थित संरचनाओं और मांडू में हिमनदों से निर्मित भू-संरचनाओं को जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित किया जाएः सरयू राय

    जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    दलमा में अवस्थित संरचनाओं और मांडू में हिमनदों से निर्मित भू-संरचनाओं को जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित किया जाएः सरयू राय

    पत्र में क्या लिखा सरयू राय ने

    -दोनों ही संरचनाएँ प्रकृति की अमूल्य भूगर्भीय धरोहर हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है
    -अज्ञानतावश मानवीय हस्तक्षेप से इनके विनष्ट होने का ख़तरा उत्पन्न हो सकता है
    – राज्य के गौरव को बढ़ाने के लिए धरोहरों को सुरक्षित एवं संरक्षित करना जरूरी

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर/रांची। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दलमा महासागरीय ज्वालामुखी क्षेत्र में अवस्थित संरचनाओं तथा मांडू के दूधी नाला क्षेत्र में अवस्थित महादेशीय हिमनदों से निर्मित भू संरचनाओं को जियोलॉजिकल हैरिटेज (भूगर्भीय धरोहर) घोषित करने की मांग की है।

    राज्यपाल और मुख्यमंत्री को अलग-अलग लिखे पत्रों में सरयू राय ने कहा है कि झारखंड में दो दुर्लभ भूगर्भीय संरचनाएँ मौजूद हैं, जिन्हें भूगर्भीय धरोहर घोषित करना श्रेयस्कर होगा। पहली भूगर्भीय संरचना पश्चिम सिंहभूम जिला के दलमा वन क्षेत्र में है और दूसरी संरचना हजारीबाग जिला में मांडू के समीप स्थित दूधी नाला में है। दोनों ही संरचनाएँ प्रकृति की अमूल्य भूगर्भीय धरोहर हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

    सरयू राय के अनुसार, उपर्युक्त दोनों स्थानों पर स्थित प्रकृति के अनमोल उपहारों को अविलम्ब भूगर्भीय धरोहर घोषित कर सुरक्षित एवं संरक्षित किया जाना चाहिए अन्यथा अज्ञानतावश मानवीय हस्तक्षेप से इनके विनष्ट होने का ख़तरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसी घोषणा के लिए आज का दिन यानी विश्व पर्यावरण दिवस सर्वथा उपयुक्त है। इसीलिए बहुत उम्मीद के साथ इस विषय की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कर रहा हूँ।

    उन्होंने लिखा कि दलमा क्षेत्र महासागरीय ज्वालामुखी का एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक अवशेष है, जिसकी आयु क़रीब 160 करोड़ वर्ष आँकी गई है। दलमा ज्वालामुखी क्षेत्र दूर अतीत में छोटानागपुर टेक्टोनिक प्लेट और सिंहभूम टेक्टोनिक प्लेट के टकराने से बना है। यह भूगर्भीय घटना खनिजों के निर्माण यथा तांबा, यूरेनियम, सोना आदि में सहायक सिद्ध हुईं है। चांडिल और जमशेदपुर के बीच सहरबेडा के समीप चिलगू बस स्टॉप के पास ज्वालामुखीय राख के जमाव के अवशेष, आग्लोमरेट, सड़क के किनारे विद्यमान हैं, जो अनुचित मानवीय हस्तक्षेप का शिकार हो रहे हैं।

    सरयू राय ने पत्र में लिखा है कि दलमा अभयारण्य की ओर जाने वाले चढाई मार्ग पर “पिलो लावा” की संरचनाएं मौजूद हैं, जो भू वैज्ञानिकों के अध्ययन के दौरान पाई गई हैं। ऐसी संरचनाएँ महासागरों और सागरों के तल पर हुए ज्वालामुखी विस्फोट से बनती है। झारखंड खनिज प्रोग्रामिंग बोर्ड ने भी सैद्धांतिक रूप से इसे जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति दी है। जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया भी भूगर्भीय महत्व की ऐसी प्राकृतिक संरचनाओं को जियोलॉजिकल हैरिटेज के रूप में घोषित करने का पक्षधर है। जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रांची टीम ने इस परियोजना पर प्राथमिक अध्ययन किया है और इसे भूगर्भीय धरोहर घोषित किए जाने के लिए सर्वथा उपयुक्त पाया है। आप सहमत होंगे कि विश्व पर्यावरण दिवस पर इसके संरक्षण की घोषणा एक सकारात्मक पहल होगी।

    पत्र के अनुसार, दलमा महासागरीय ज्वालामुखी क्षेत्र अगर जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित हो जाए तो प्रकृति की अनुपम देन यह भूगर्भीय धरोहर भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित हो जाएगी। वर्तमान में झारखंड में केवल राजमहल फॉसिल पार्क ही भूगर्भीय हैरिटेज घोषित हुआ है जबकि राज्य में अनेक जियोलाजिकल हैरिटेज बिखरे पड़े हैं, जिनका संरक्षण वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक धरोहर होगी।

    श्री राय ने मांडू के समीप स्थित दूधी नाला में 30 करोड़ वर्ष पुराने महादेशीय हिमनदों से निर्मित भू संरचनाओं के बारे में भी लिखा है। उनके अनुसार, यह नाला सहायक जलस्रोत के रूप में बोकारो नदी में मिलता है। भूगर्भीय अध्ययनों का निष्कर्ष है किसी कालखंड में यह महासागरीय क्षेत्र रहा होगा। यहां हिमनद हुआ करते होंगे। ये हिमनद महासागर में मिलते होंगे जिसके अवशेष यहाँ अभी तक संरक्षित हैं। जानकारी के अभाव में कुछ वर्ष पहले इस स्थल पर चेक डैम निर्माण की सरकारी योजना स्वीकृत हो गई थी, जिसके कारण प्रकृति के इस अनमोल उपहार के विनष्ट होने का ख़तरा उत्पन्न हो गया था। कतिपय भू-वैज्ञानिकों की सक्रियता के कारण यह विनष्ट होने से बच गया। ऐसे स्थल को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए इसे जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित करना परम आवश्यक प्रतीत होता है।

    श्री राय के अनुसार, ऐसे प्राकृतिक भू-दृश्य यदि सरकारी संरक्षण के अभाव में मानवीय हस्तक्षेप के कारण अज्ञानतावश विनष्ट हो जाते हैं तो प्रकृति इसे दोबारा नहीं बना पाएगी।

    पत्र के अंत में उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि राज्य के गौरव को विश्वस्तरीय भूगर्भीय मानचित्र पर योग्य स्थान दिलाने के लिए ऐसी प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने में सार्थक पहल करने की जरूरत है। विश्व पर्यावरण दिवस इसके लिए सर्वथा उपयुक्त अवसर है। इस अवसर पर दलमा महासागरीय ज्वालामुखी क्षेत्र एवं दूधी नाला हिमनद क्षेत्र को जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित करने से राज्य के वैश्विक भूगर्भीय मानचित्र पर गौरवपूर्ण स्थान मिलना सुनिश्चित होगा।

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