लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
पटना: बिहार में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। बिहार सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के द्वितीय चरण के अंतर्गत, इस महीने से 200 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरनी शुरू हो जाएंगी। यह पहल राज्य में पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल वायु प्रदूषण कम होगा बल्कि यात्रियों को भी आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा। इस व्यापक योजना का उद्देश्य बिहार के शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ और कुशल सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का विस्तार करना है, जिससे राज्य के नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधाएँ मिल सकें।
राज्य मंत्रिमंडल ने छह मई को एक दूरगामी निर्णय लेते हुए प्रधानमंत्री ई-बस सेवा (द्वितीय चरण) के तहत 400 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन के लिए 517.16 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी बिहार के हरित परिवहन लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस योजना के माध्यम से बिहार सरकार शहरी गतिशीलता को नया आयाम देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके। [INTERNAL_LINK_HOLDER]
बिहार में 200 इलेक्ट्रिक बसें और हरित क्रांति
परिवहन विभाग के सचिव राजकुमार ने इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा (द्वितीय चरण) के तहत बिहार के छह प्रमुख शहरों — पटना, मुजफ्फरपुर, गयाजी, भागलपुर, दरभंगा और पूर्णिया — में कुल 400 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन किया जाएगा। इन 400 बसों में से, पहले चरण में 200 इलेक्ट्रिक बसें का परिचालन इसी माह, जून से, शुरू होगा। यह न केवल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके कार्बन उत्सर्जन को घटाने में मदद करेगा, जिससे शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। यह पहल बिहार को हरित भविष्य की ओर ले जाने में सहायक होगी, जहां सार्वजनिक परिवहन स्वच्छ और सतत होगा।
महिलाओं के लिए ‘पिंक बसें’ और रोजगार के अवसर
राज्य सरकार महिला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर भी गंभीर है। सचिव राजकुमार ने बताया कि राज्य सरकार छह प्रमुख शहरों में महिला यात्रियों के लिए 100 ‘पिंक बसों’ का परिचालन कर रही है। इन विशेष बसों को महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है और इनमें सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग और आपात बटन जैसी आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, इन बसों के संचालन के लिए 100 महिला चालकों को प्रशिक्षित करने की योजना भी बनाई गई है। पहले चरण में, 22 महिला चालकों को पहले ही सफलतापूर्वक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, और बड़ी संख्या में महिला परिचालकों को भी प्रशिक्षित किया गया है। यह पहल न केवल महिलाओं को सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगी बल्कि उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान कर सशक्त भी करेगी।
परिवहन अवसंरचना का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण
परिवहन विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, सरकार राज्य में सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 31 आधुनिक बस टर्मिनल का विकास किया जाएगा। इन टर्मिनलों में यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं जैसे प्रतीक्षा क्षेत्र, शौचालय, सूचना केंद्र और वाणिज्यिक स्थान उपलब्ध होंगे। साथ ही, पहले चरण में 200 स्थानों पर ‘इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ (आईटीएमएस) नामक एक उन्नत प्रणाली लागू की जाएगी। इस प्रणाली का विस्तार भविष्य में 500 स्थानों तक किया जाएगा, जिससे यातायात प्रबंधन अधिक कुशल और सुगम बन सकेगा। आईटीएमएस यातायात प्रवाह को अनुकूलित करने, भीड़भाड़ को कम करने और दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करेगा, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा अनुभव बेहतर होगा। यह आधुनिक प्रणाली शहरों को स्मार्ट मोबिलिटी समाधानों की ओर ले जाएगी।
बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 और प्रोत्साहन
बिहार सरकार ने हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाया है। सचिव राजकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में बिहार इलेक्ट्रिक वाहन (संशोधित) नीति-2026 को मंजूरी दी है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाना है। नीति के तहत, महिलाओं को इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन खरीदने पर एक लाख रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खरीद पर 12 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह प्रोत्साहन योजना उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित करने और उन्हें खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
इस साल 13 मई को स्वीकृत हुई इस नीति का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है: वर्ष 2030 तक राज्य में नए वाहन पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत तक पहुंचाना। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार कई मोर्चों पर काम कर रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार राजमार्गों, पेट्रोल पंप, होटल, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर चार्जिंग अवसंरचना का तेजी से विस्तार करेगी। नई नीति के तहत ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए विभिन्न वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे, जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों को चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा सके। यह सुनिश्चित करेगा कि इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को चार्जिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो, जिससे उनकी चिंताएं कम होंगी और इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की दर बढ़ेगी।
डिजिटल परिवहन सेवाएं और चालक प्रशिक्षण
विभाग ने सुरक्षित, तकनीक आधारित और नागरिक-अनुकूल परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई डिजिटल पहलों को भी बढ़ावा दिया है। इसमें डिजिटल परिवहन सेवाएं शामिल हैं, जो नागरिकों को परिवहन संबंधी सेवाओं तक आसानी से पहुंचने में मदद करेंगी। भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) के माध्यम से ऑनलाइन ई-चालान भुगतान की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे जुर्माने का भुगतान करना अधिक सुविधाजनक हो गया है। इसके अलावा, पेशेवर और प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक चालक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य चालकों को आधुनिक ड्राइविंग तकनीकों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और ग्राहक सेवा कौशल में दक्ष बनाना है, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार हो और यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सके। यह समग्र दृष्टिकोण बिहार के परिवहन क्षेत्र को एक नई दिशा देगा।
निष्कर्षतः, बिहार सरकार की यह पहल एक स्वच्छ, हरित और आधुनिक भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। 200 इलेक्ट्रिक बसें और आगामी 400 बसों का बेड़ा राज्य के परिवहन परिदृश्य को पूरी तरह से बदल देगा। इन प्रयासों से न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि नागरिकों को भी विश्व स्तरीय परिवहन सुविधाएं प्राप्त होंगी, जिससे बिहार की प्रगति को गति मिलेगी। इन बसों का आगमन बिहार की सड़कों पर एक नई ऊर्जा और उत्साह लेकर आएगा।अधिक जानकारी के लिए, आप इलेक्ट्रिक बसों के बारे में विकिपीडिया पर पढ़ सकते हैं।
