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    गिरिडीह गुजरात से घर लौट रहे सीनियर सुपरवाइजर की पारसनाथ स्टेशन पर दर्दनाक मौत, ट्रेन से उतरते समय हुआ हादसा

    Sumi BangabashBy Sumi BangabashJune 2, 2026No Comments5 Mins Read
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    गिरिडीह गुजरात से घर लौट रहे सीनियर सुपरवाइजर की पारसनाथ स्टेशन पर दर्दनाक मौत, ट्रेन से उतरते समय हुआ हादसा

     राष्ट्र संवाद संवादाता 

    गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत पोचरी गांव के रहने वाले युवा कर्मी मिथुन मंडल की पारसनाथ रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। गुजरात से अपने घर लौट रहे मिथुन मंडल ट्रेन से उतरने के दौरान असंतुलित होकर गिर पड़े, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। एक होनहार और मेहनती युवक की असामयिक मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।

    जानकारी के अनुसार, मिथुन मंडल लंबे समय से गुजरात में रहकर कार्य कर रहे थे। वे ट्रांसमिशन लाइन से जुड़े कार्यों में लगी स्टार लाइट कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। अपने व्यवहार, कार्यकुशलता और मेहनत के कारण वे कंपनी में एक जिम्मेदार कर्मचारी के रूप में जाने जाते थे। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वे वर्षों से घर से दूर रहकर नौकरी कर रहे थे।
    बताया जाता है कि मिथुन मंडल कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने गांव पोचरी लौट रहे थे। इसके लिए उन्होंने भुसावल से मुंबई-हावड़ा मेल ट्रेन पकड़ी थी। यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी और वे जल्द ही अपने परिजनों से मिलने वाले थे। परिवार के लोग भी उनके घर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

    प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जब ट्रेन पारसनाथ रेलवे स्टेशन पहुंची तो मिथुन मंडल उतरने की तैयारी करने लगे। इसी दौरान किसी कारणवश उनका संतुलन बिगड़ गया और वे प्लेटफॉर्म पर गिर पड़े। गिरने के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसा इतना भयावह था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
    घटना की सूचना रेलवे कर्मियों और स्थानीय लोगों को मिलते ही स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत सहायता का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। बाद में मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों और परिजनों को दी गई।

    घटना की खबर मिलते ही बेको पूर्वी पंचायत के पूर्व मुखिया टेकलाल चौधरी पारसनाथ रेलवे स्टेशन पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मिथुन मंडल एक मेहनती और जिम्मेदार युवक थे, जिनकी असामयिक मृत्यु पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
    मिथुन मंडल की मौत की खबर जैसे ही पोचरी गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिन परिजनों ने उनके स्वागत की तैयारी कर रखी थी, उन्हें उनके निधन की सूचना मिली तो वे बदहवास हो गए। माता-पिता, पत्नी, भाई-बहन और अन्य परिजन गहरे सदमे में हैं।

    ग्रामीणों ने बताया कि मिथुन स्वभाव से बेहद मिलनसार और सरल व्यक्ति थे। गांव आने पर वे सभी लोगों से आत्मीयता के साथ मिलते थे और हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहते थे। उनकी मेहनत और लगन के कारण गांव के युवाओं के बीच भी उनकी अच्छी पहचान थी। रोजगार के लिए बाहर रहकर भी वे अपने गांव और परिवार से लगातार जुड़े रहते थे।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि मिथुन मंडल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। उनकी कमाई पर परिवार की कई जिम्मेदारियां निर्भर थीं। ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत ने परिवार को भावनात्मक ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी गहरा आघात पहुंचाया है।

    घटना के बाद क्षेत्र के कई सामाजिक और जनप्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त किया है। लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार को इस कठिन समय में धैर्य रखने की शक्ति देने की कामना की है। ग्रामीणों का कहना है कि मिथुन की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
    रेलवे स्टेशन और ट्रेन यात्रा के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर भी इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। अक्सर देखा जाता है कि चलती ट्रेन से उतरने या जल्दबाजी में प्लेटफॉर्म पर कदम रखने के दौरान हादसे हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों को ट्रेन पूरी तरह रुकने के बाद ही उतरना चाहिए और जल्दबाजी से बचना चाहिए। हालांकि मिथुन मंडल के मामले में हादसे की वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

    फिलहाल पूरे पोचरी गांव में शोक का माहौल है। हर किसी की जुबान पर मिथुन मंडल की चर्चा है और लोग उनकी असामयिक मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं। घर लौटने की खुशी लेकर निकले मिथुन अपने गांव तो पहुंचे, लेकिन जीवित नहीं। उनके निधन ने परिवार के सपनों को तोड़ दिया और पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया।
    मिथुन मंडल की दर्दनाक मौत एक ऐसी त्रासदी बन गई है, जिसने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे दुख में डुबो दिया है। गांव के लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि इस कठिन समय में उन्हें कुछ राहत मिल सके। वहीं परिजन अब भी इस हादसे पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं और अपने प्रिय सदस्य को खोने के गम से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।

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