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    Home » अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डाॅo हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन’ एवं वर्तमान अध्यक्ष डाॅo महामाया प्रसाद ‘विनोद’ डाॅo निर्भीक स्मृति सम्मान से हुए सम्मानित
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    अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डाॅo हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन’ एवं वर्तमान अध्यक्ष डाॅo महामाया प्रसाद ‘विनोद’ डाॅo निर्भीक स्मृति सम्मान से हुए सम्मानित

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMay 21, 2026No Comments3 Mins Read
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    अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डाॅo हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन’ एवं वर्तमान अध्यक्ष डाॅo महामाया प्रसाद ‘विनोद’ डाॅo निर्भीक स्मृति सम्मान से हुए सम्मानित

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर। नगर के अग्रणी साहित्यिक संस्था ‘जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद’ द्वारा स्थानीय तुलसी भवन के मानस सभागार में परिषद के पूर्व प्रधान सचिव एवं भोजपुरी साहित्य जगत के युग पुरुष डाॅ. रसिक बिहारी ओझा ” निर्भीक” जयंती सह स्मृति सम्मान समारोह का आयोजन किया गया ।
    इस अवसर पर विगत वर्षों की भाँति भोजपुरी – हिन्दी साहित्य के लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार एवं अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डाॅ० हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन’ ( राॅची ) तथा वर्तमान अध्यक्ष डाॅo महामाया प्रसाद ‘विनोद’ (पटना) को मुख्य अतिथि सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह, विशिष्ट अतिथिद्वय अरका जैन विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डाॅ० अंगद तिवारी एवं तुलसी भवन के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र मुनका द्वारा संयुक्त रुप से “निर्भीक स्मृति सम्मान – 2026” के रुप में अंगवस्त्रम् , पगड़ी, श्रीफल, सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह, पुष्पगुच्छ एवम् नगद सम्मान राशि प्रदान की गयी । तत्पश्चात परिषद् के प्रधान सचिव डाॅ० अजय कुमार ओझा द्वारा सम्पादित नगर से प्रकाशित भोजपुरी पत्रिका “निर्भीक संदेश” के 28 वें अंक का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया ।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष डाॅ० प्रसेनजित तिवारी एवं संचालन सह सचिव डाॅo संध्या सिन्हा ने की ।
    कार्यक्रम का आरंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन एवं डाॅo निर्भीक के चित्र पर पुष्पार्पण के बाद संयुक्त सचिव श्रीमती माधवी उपाध्याय के सरस्वती वंदना से हुई —
    “जगतव्यापिनी,वरप्रदायिनी
    हंसवाहिनी मइया की जय!
    माई शारदा अइसन वर द
    बुद्धि,विवेक,ज्ञान उर भरि द।।
    साहस शील हिया में भरि के….”
    ततपश्चात् प्रधान सचिव डॉ० अजय कुमार ओझा ने अपने स्वागत वक्तव्य के दौरान उपस्थित साहित्य साधकों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए परिषद द्वारा पिछले तेरह वर्षो से दिये जाने वाले डाॅ ० निर्भीक स्मृति सम्मान की विस्तार से चर्चा की । निर्भीक जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए परिषद के प्रकाशन सचिव श्री हरिहर राय चौहान एवं शहर जानी-मानी विदूषी डाॅo रागिनी भूषण ने उनके व्यक्तित्त्व – कृतित्व के ढेर सारे अनछुए पहलू पर विस्तार से प्रकाश डाला । जबकि काव्यात्मक श्रद्धांजलि डाॅ० कैलाश नाथ शर्मा ‘गाजीपुरी’ ने प्रस्तुत किया । तत्पश्चात सम्मानित अतिथिद्वय का साहित्यिक परिचय संयुक्त सचिव डाॅ० वीणा पाण्डेय ‘भारती’ एवं उपाध्यक्ष श्री शैलेन्द्र पाण्डेय ‘शैल’ ने प्रस्तुत किया । जबकि श्री यमुना तिवारी ‘व्यथित’ ने उनका काव्यात्मक परिचय प्रस्तुत की । अपने संंबोधन के दौरान मुख्य अतिथि श्री प्रभाकर सिंह ने परिषद द्वारा पूर्वज को याद किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की । विशिष्ट अतिथि डाॅ० अंगद तिवारी ने कहा कि भोजपुरी की ताजगी मेरे मन को हमेशा आनंदित करती है। डाॅ० निर्भीक जी के कृतित्व को अधिकाधिक पढने और समझने की जरूरत है। जबकि सम्मानित अतिथि डाॅ० हरेराम त्रिपाठी चेतन ने कहा कि निर्भीक जी का यशोकाय और प्रभा बहुत ही विस्तृत और स्पृहणीय है। उनकी रचनाओं का पठन पाठन होना चाहिए ताकि भोजपुरी के नए रचनाकार सीख सकें।
    वे भोजपुरी के एकनिष्ठ तथा समर्पित रचनाकार और मनीषी थे । जबकि डाॅo महामाया प्रसाद विनोद ने कहा कि डॉo निर्भीक ने न केवल विभिन्न विधाओं में लेखन किया बल्कि कई नए लोगों की रचनाशीलता को भी प्रशिक्षित किया। डॉ निर्भीक जी के काम को आगे बढ़ाते हुए हमें जनभाषा भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रखंड और जिला स्तर तक आंदोलन की आवश्यकता है।
    कार्यक्रम के अंत में श्री सूरज सिंह राजपूत द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया ।
    इस अवसर पर शताधिक साहित्यकारों सहित प्रेमी जन उपस्थित रहे ।

    अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के स्वर्ण जयंती वर्ष में 27वाँ अधिवेशन की पूर्व संध्या पर प्रेसवार्ता का आयोजन"
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