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    Home » ईश्वर केंद्रित शिक्षा पद्धति की आवश्यकता : आनंद मार्ग
    जमशेदपुर झारखंड

    ईश्वर केंद्रित शिक्षा पद्धति की आवश्यकता : आनंद मार्ग

    Aman OjhaBy Aman OjhaMay 19, 2026No Comments2 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता 

    जमशेदपुर। आनंद मार्ग प्रचारक संघ के महिला स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर के दौरान गदरा आनंद मार्ग जागृति से एक शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा गदरा और गोविंदपुर की मुख्य सड़कों से होते हुए “बाबा नाम केवलम” कीर्तन के साथ संपन्न हुई। इस दौरान महिलाओं ने “दुनिया के नैतिकवादियों एक हो”, “विश्व बंधुत्व कायम हो”, “जात-पात की करो विदाई, आपस में हैं भाई-भाई” और “एक चूल्हा, एक चौका, एक है मानव समाज” जैसे नारे लगाए।

    प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए आनंद मार्ग की महिला संन्यासिनियों अवधूतिका आनंदनिष्ठा आचार्या, अवधूतिका आनंदनम्रता आचार्या और अवधूतिका आनंद सहिष्णुता आचार्या ने कहा कि अध्यात्म के बिना शिक्षा अधूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का अधिकार है तथा समाज का दायित्व है कि वह इस अधिकार को सुनिश्चित करे।

    वक्ताओं ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से बुरा नहीं होता। उचित मार्गदर्शन के अभाव में मनुष्य गलत दिशा में चला जाता है, लेकिन उसकी प्रवृत्तियों को सकारात्मक दिशा देकर उसे बेहतर इंसान बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य “देव शिशु” है और इसी दृष्टिकोण से समाज की कार्यपद्धति तय होनी चाहिए।

    आनंद मार्ग की संन्यासिनियों ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि आधुनिक भोगवादी संस्कृति के प्रभाव से समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए नव्य-मानवतावादी, ईश्वर केंद्रित शिक्षा पद्धति को अपनाने की आवश्यकता है।

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