राष्ट्र संवाद संवाददाता
भीषण गर्मी में यूसिल अस्पताल जादूगोड़ा के मरीजों का हाल बेहाल है। आलम यह है कि डॉक्टर चैंबर, इमरजेंसी , में जरूरत से ज्यादा एसी लगे हुए है यूसिल मरीजों को सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है व कंपनी का अस्पताल हालत यह है मरीजों का इलाज क्या करे खुद बीमार लगता है। अस्पताल के मेल व फीमेल वार्ड में लगे कुलर व एक्जॉस्ट फैन खराब पड़े हुए है।शोभा की वस्तु बन कर रह गई है।। इस बाबत मरीज कहते है कि यूसिल अस्पताल का बेड वर्षी से खराब पड़ा हुए है। लेटते ही एक फिट नीचे चले जाता है। अस्पताल में रखे सामग्री में जंग लग गई व बीमारियों को आमंत्रित कर रही है। भर्ती मरीजों को दवा तक नहीं मिलती।उन्हें भी दवा बाहर से खरीद कर खानी पड़ती है।बहर हाल देखना यह है भारत सरकार की संस्थान यूसिल अस्पताल की बदहाली कब सुधरती है या यूं ही भीषण गर्मी में लोगों की जान लेती रहेगी।
यूसिल अस्पताल में यूनियन के नेताओं के द्वारा ए सी लगाने की मांग कई वर्षों से लंबित है ए सी नहीं होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी होती भीषण गर्मी में मरीज यहां बेचैन रहते हैं। यूसिल के मरीज अब अस्पताल में भर्ती होने से भी अब कतराने लगे हैं।
संयुक्त यूनियन के नेताओं ने बताया कि
यूसील अस्पताल में आउटसोर्सिंग कंपनी के द्वारा दवाई सही समय पर नहीं दी जाती है जरूरी दवाई के लिए भी एक सप्ताह का समय ले लिया जाता है वहीं कई दवाई को तो उसके बदले दूसरी कंपनी की दवाई दी जाती है जिससे भी मरीजों में भारी नाराजगी हे।
यूसिल प्रबंधन के द्वारा आउटसोर्सिंग कंपनी के के फर्म को 2 साल का 16 करोड़ का टेंडर दवाई सप्लाई का दिया गया है लेकिन उनके द्वारा दवाई की सप्लाई में भारी लापरवाही बरती जाती है जिससे मरीज बेचैन रहते हैं।
संयुक्त यूनियन के द्वारा के के फार्मा को ब्लैक लिस्ट कर दूसरी दवाई कंपनी को सप्लाई का काम देने की मांग भी की गई है यूसिल सीएमडी भी के के फार्मा के कार्यशैली से काफी नाराज है उन्हें लगातार इनकी शिकायत मिलते रहती है।
यूसील हॉस्पिटल में नसों की भी है भारी कमी पहले जहां यूसिल अस्पताल में 29 नर्स होती थी अब मात्र 12 नर्स रह गई है उसमें भी अधिकतर परमानेंट नर्स नहीं है जिससे भी मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है यूसिल अस्पताल लगातार डॉक्टर यहां रिटायरमेंट हो रहे हैं और कई डॉक्टर यहां छोड़कर भी चले गए हैं जिससे भी यहां डॉक्टरों की भारी कमी हो गई है जहां यूसिल अस्पताल में पहले 15 डॉक्टर होते थे अब सात डॉक्टर रह गए हैं वहीं यूसिल अस्पताल के डॉक्टर सीएमओ डॉक्टर देवाशीष भट्टाचार्य इसी साल रिटायर हो रहे हैं नया डॉक्टर की बहाली नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं होने से भी मरीज परेशान है।
यूसील प्रबंधन के द्वारा कई बार डॉक्टर की बहाली निकाली गई है लेकिन सुविधा नहीं मिलने के कारण डॉक्टर यहां आने से कतराते हैं।
भाजपा नेता मनोज प्रताप सिंह का कहना है कि यूसिल अस्पताल के में प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति नहीं है यूसील अस्पताल में प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए जिसकी जिम्मेदारी बनती है अस्पताल की देखरेख करने की।
यूसील हॉस्पिटल के सीएमओ डॉक्टर देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि 2 महीने के अंदर यहां अस्पताल में नया बेड लग जाएगा साथ ही साथ ए सी का फ़ाइल यूसिल विद्युत विभाग के यहां लटका हुआ हे।

