राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला खरसांवा अंतर्गत चांडिल प्रखंड अंतर्गत विस्थापित गांव तारकुवां और छोटालाखा में शनिवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्पेशल रैपोर्टियर सुचित्रा सिन्हा ने दौरा कर जमीनी हकीकत का आकलन किया। इस दौरान उन्होंने वर्षों से विस्थापन का दर्द झेल रहे ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और हालात पर चिंता जताई।
इससे एक दिन पहले 24 अप्रैल को उन्होंने कटिया गांव का भी निरीक्षण किया था, जहां ग्रामीणों ने अपनी परेशानियां खुलकर सामने रखीं।
दौरे के दौरान सुचित्रा सिन्हा सीधे गांवों में पहुंचीं और झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे परिवारों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से विस्थापित होने के बावजूद उन्हें अब तक राशन कार्ड, पक्का मकान, रोजगार और सरकारी पुनर्वास योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है।
तारकुवां और छोटालाखा गांव में हालात बेहद दयनीय पाए गए। कई परिवार आज भी अस्थायी घरों में रहने को मजबूर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छ पेयजल की भारी कमी से लोगों का जीवन कठिन बना हुआ है।
निरीक्षण के दौरान मौके पर उपस्थित प्रखंड विकास पदाधिकारी तलेश्वर रविदास,एवं अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागों तक पहुंचाया जाएगा और शीघ्र समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
मौके पर मुखिया बुधेश्वर बेसरा मुखिया सुभोदनी देवी,और पंचायत सचिव धनंजय मंडल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

