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    बिरसानगर की ज़मीन पर ‘खामोशी की सियासत’ बुलडोजर से माफिया तक कौन है असली संरक्षक?

    News DeskBy News DeskJanuary 31, 2026No Comments6 Mins Read
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    बिरसानगर की ज़मीन पर ‘खामोशी की सियासत’ बुलडोजर से माफिया तक कौन है असली संरक्षक?

    बिरसानगर भूमि प्रकरण में विधायक सरयू राय ने सिद्ध की अपनी निष्पक्षता और सिद्धांतों की राजनीति

    नेता ,अधिकारी और भूमि माफिया का ‘कॉकटेल’

     

    बिरसानगर थाना क्षेत्र में अवैध जमीन अतिक्रमण का खेल, उपायुक्त लगाएं रोक – अप्पू तिवारी

     

    सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण गंभीर,भाजपा नेता अंकित आनंद ने डीसी से जांच समिति गठन की किया मांग

     

     

    राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
    जमशेदपुर।एशिया की सबसे बड़ी बस्तियों में शुमार बिरसानगर की ज़मीन केवल भू-खंड नहीं, बल्कि राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला सबसे संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है। यही वजह है कि सांसद हों या विधायक, सत्ता पक्ष हो या विपक्ष इस मसले पर खुलकर बोलने से सभी कतराते रहे हैं। प्रशासनिक पदाधिकारी भी अपनी-अपनी मजबूरियों में बंधे नजर आते हैं। कभी सत्ता पक्ष का दबाव, तो कभी विपक्ष द्वारा प्रशासन की “कमजोर नस” दबाने की कोशिश इस खींचतान में सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी का हुआ है, तो वह बिरसानगर के आम लोगों का है।

    इतिहास गवाह है कि बिरसानगर में बुलडोजर की गूंज नई नहीं है। मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में भी यहां बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चला, जिसके सामाजिक और राजनीतिक परिणाम पूरे शहर ने देखे। घर उजड़े, विश्वास टूटा और सत्ता के खिलाफ नाराजगी सड़कों तक आ गई। इसके बाद जब विधायक सरयू राय का दौर आया, तो लोगों में एक नई उम्मीद जगी—या तो ज़मीन पर वैधानिक अतिक्रमण नहीं होगा, या फिर वर्षों से बसे घरों को किसी न किसी रूप में मान्यता मिलेगी।

     


    लेकिन यह उम्मीद पूरी तरह साकार नहीं हो सकी। बने हुए घरों को वैधानिक मान्यता नहीं मिली और इसी बीच एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे इलाके की राजनीति को झकझोर दिया। चुनाव के ठीक बाद एक अधिवक्ता की हत्या हुई और नाम विधायक के एक करीबी से जुड़ा। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विधायक सरयू राय ने सार्वजनिक रूप से इस पर कोई पैरवी नहीं की। नतीजतन आरोपी वर्षों तक जेल में रहा। उस समय लोगों ने इसे “न्याय की जीत” माना, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

     

    अब वही आरोपी जेल से बाहर आते ही एक बार फिर सक्रिय हो गया है इस बार एक कथित भूमि माफिया के रूप में। पहले उसके साथ अलग-अलग चेहरे नजर आते थे, लेकिन अब पूरी कमान पिता-पुत्र के हाथ में बताई जा रही है। सवाल यह है कि बिरसानगर से लेकर गोविंदपुर तक हाल के वर्षों में जो नया अतिक्रमण हुआ है, उसमें करीब 95 प्रतिशत मामलों में इन्हीं का हाथ बताया जा रहा है। यह महज आरोप नहीं, बल्कि एक गंभीर जांच का विषय है।

     

    सूत्रों के अनुसार गोविंदपुर के कई ऐसे इलाकों में अतिक्रमण हुआ है, जिन पर अब तक सरकार की सीधी नजर नहीं पड़ी है। स्थानीय थानेदार बेवश दिखाई देते हैं, अंचल कार्यालय (सीओ ऑफिस) मूकदर्शक बना हुआ है। स्थिति यह है कि एसएसपी और उपायुक्त भी वही देख पा रहे हैं, जो उन्हें दिखाया जा रहा है। ज़मीनी हकीकत और फाइलों के बीच का फासला लगातार बढ़ता जा रहा है।

     

    सबसे बड़ा और खतरनाक सवाल अब यह उठ रहा है—बिरसानगर में भूमि माफिया का असली संरक्षक कौन है? क्या यह सिर्फ अपराधियों का खेल है, या फिर इसमें कुछ नेता, कुछ कथित पत्रकार और भूमि माफिया का ‘कॉकटेल’ मिलकर यह खेल खेल रहा है? यदि ऐसा है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह जाता, बल्कि लोकतंत्र और प्रशासनिक ईमानदारी पर सीधा हमला बन जाता है।

     

    बिरसानगर के लोग आज भी उसी असमंजस में जी रहे हैं कब फिर बुलडोजर आएगा, कब फिर उनके आशियाने राजनीति की भेंट चढ़ेंगे। जब तक ज़मीन के इस पूरे खेल की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तब तक न तो जनता को भरोसा मिलेगा और न ही प्रशासन की साख बचेगी। सवाल साफ है बिरसानगर की ज़मीन पर चल रहे इस ‘खेला’ का पर्दाफाश कब होगा, और क्या कभी सच सामने आएगा?

     

     

    बिरसानगर थाना क्षेत्र में अवैध जमीन अतिक्रमण का खेल, उपायुक्त लगाएं रोक – अप्पू तिवारी

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    जमशेदपुर।बिरसानगर थाना क्षेत्र में अवैध रूप से जमीन अतिक्रमण का मामला लगातार सामने आ रहा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर आजसू पार्टी के प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने जिला प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उपायुक्त से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
    अप्पू तिवारी ने कहा कि बिरसानगर क्षेत्र में सरकारी एवं निजी जमीनों पर खुलेआम अतिक्रमण हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। इससे न सिर्फ कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो रही है, बल्कि आम जनता के अधिकारों का भी हनन हो रहा है।
    उन्होंने उपायुक्त से मांग की कि अवैध अतिक्रमण पर तत्काल रोक लगाई जाए और एक सख्त नियम बनाया जाए, जिसके तहत जिस थाना क्षेत्र में थाना अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान जमीन अतिक्रमण की घटनाएं होती हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाए। अप्पू तिवारी ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में संबंधित थाना अध्यक्ष पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ वेतन कटौती का भी प्रावधान होना चाहिए, ताकि लापरवाही पर प्रभावी अंकुश लग सके।
    अप्पू तिवारी ने स्थानीय विधायक पूर्णिमा दास साहू से भी मांग किया कि आपके क्षेत्र में धड़ल्ले से अतिक्रमण हो रहा है और आपका ध्यान नहीं जा रहा और जब बस्तियां बस जाएंगी और उन्हें उजाड़ने की कवायद होगी फिर आपके ऊपर लोग लांछन लगाएंगे कि विधायक महोदया जमीन अतिक्रमण मुक्त होने से बचाने में असफल रही जबकि पूर्व में ही भोली भाली जनता इस जाल में फंसती जा रही है
    अप्पू तिवारी ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो अवैध अतिक्रमण का यह खेल और तेजी से फैलेगा, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस दिशा में जल्द ठोस पहल नहीं की, तो आजसू पार्टी जनहित में आंदोलन करने को बाध्य होगी।

     

     

    सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण गंभीर,भाजपा नेता अंकित आनंद ने डीसी से जांच समिति गठन की किया मांग

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    भाजपा नेता अंकित आनंद ने बिरसानगर थाना क्षेत्र सहित जमशेदपुर अंचल क्षेत्र में सरकारी भूखंडों पर बढ़ते अवैध अतिक्रमण को गंभीर चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में अंचल राजस्व कर्मियों की शिथिलता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। यदि अंचल कर्मी नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण करें और स्थल निरीक्षण को प्राथमिकता दें, तो अतिक्रमण की घटनाओं में स्वाभाविक कमी आ सकती है।

    अंकित आनंद ने यह भी कहा कि थाना स्तर पर भू-माफियाओं को कथित संरक्षण मिलना Rule of Law के सिद्धांत को चुनौती देता है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने उपायुक्त से मांग की कि एक विशेष निगरानी समिति तथा स्वतंत्र जाँच कमिटी का गठन कर समस्त मामलों की विस्तृत जाँच कराई जाए और समयबद्ध रिपोर्ट तलब की जाए, ताकि सरकारी भूमि की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

     

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