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    Home » चुनावी शोर में ‘लालच’ का खंजर जब राजनीति नहीं लूट बनी हमले की वजह !
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    चुनावी शोर में ‘लालच’ का खंजर जब राजनीति नहीं लूट बनी हमले की वजह !

    Sponsored By: सोना देवी यूनिवर्सिटीJanuary 17, 2026No Comments3 Mins Read
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    चुनावी शोर में ‘लालच’ का खंजर,जब राजनीति नहीं, लूट बनी हमले की वजह !
    राष्ट्र संवाद
    नांदेड़, मुंबई (इंद्र यादव) महाराष्ट्र चुनाव के समय जब हवा में नारों की गूँज और वादों की मिठास होती है, तब कुछ लोग अंधेरे में धारदार हथियारों के साथ शिकार की तलाश में होते हैं। नांदेड़ में कांग्रेस उम्मीदवार सारिका भालेराव के पति शिवाजी भालेराव पर हुआ हमला इसी कड़वी हकीकत को बयां करता है।

     

    शुरुआत में लगा कि यह चुनावी रंजिश का कोई खूनी खेल है,जैसा कि अक्सर राजनीति में होता आया है। लेकिन पुलिस की जांच ने जो पर्दा उठाया, वह और भी डरावना है। हमलावरों का मकसद कोई विचारधारा या हार-जीत नहीं, बल्कि वह रुपयों वाला बैग था, जिसके बारे में उन्हें लगा कि उम्मीदवार का पति शायद वोट बांटने या प्रचार के लिए लेकर चल रहा है।

     

     

    सोचनीय : ‘पैसे वाला बैग’ और अपराधियों की पैनी नजर

    यह समाज के लिए एक बड़ा सोच का विषय है कि आज अपराधियों को पता है कि चुनाव के दौरान पैसा कहाँ और किसके पास हो सकता है। 18 से 22 साल के युवा, जिनके हाथों में कलम या हुनर होना चाहिए था, वे ‘पैसे के बैग’ की उम्मीद में तलवारें लेकर घूम रहे हैं। हमलावरों ने खुद को छिपाने के लिए चुनावी जुमलेबाजी का सहारा लिया और चिल्लाए,”हमारे खिलाफ क्यों बोले! “ताकि मामला राजनीतिक लगे और वे आसानी से निकल जाएं। वाह! अपराधियों की ‘क्रिएटिविटी’ देखिये, अपराध भी अब राजनीति की आड़ में छिपकर किए जा रहे हैं।

     

     

    भावुक पक्ष: डर के साये में लोकतंत्र

    सोचिए उस पत्नी (सारिका भालेराव) पर क्या गुजरी होगी, जो जनता के बीच जाकर सेवा का मौका मांग रही है, लेकिन उसे खबर मिलती है कि उसके पति पर जानलेवा हमला हुआ है। क्या हमारा लोकतंत्र इतना असुरक्षित हो गया है कि एक उम्मीदवार का परिवार रात के अंधेरे में सुरक्षित महसूस न करे! मात्र 10,000 रुपये और कुछ कपड़ों के लिए किसी की जान लेने की कोशिश करना यह दर्शाता है कि हमारे समाज के एक हिस्से में मानवीय जीवन की कीमत कितनी सस्ती हो गई है।

     

    एक विचारणीय प्रश्न: अगर यह हमला सिर्फ लूटपाट के लिए था, तो क्या हम इस बात पर सुकून मनाएं कि यह ‘राजनीतिक’ नहीं था? या इस बात पर दुख जताएं कि हमारे नौजवान सिर्फ चंद रुपयों के लिए किसी का खून बहाने को तैयार हैं!

     

     

    पुलिस की मुस्तैदी को सलाम

    राहत की बात बस इतनी रही कि नांदेड़ पुलिस (एलसीबी) ने महज 12 घंटों के भीतर इन ‘भटके हुए’ अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। एसपी अविनाश कुमार की टीम ने त्वरित कार्रवाई कर यह साबित किया कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी दिखाएं, कानून के हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं।

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